केरल राज्य बुजुर्ग आयोग ने कोच्ची में आयोजित सुनवाई में बुजुर्गों की असुरक्षा, बच्चों द्वारा उपेक्षा, वित्तीय धोखाधड़ी और पड़ोसियों के झगड़े जैसी समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताया। सात शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को 85 लाख रुपये का नुकसान शामिल है।
Key Takeaways
- बुजुर्गों को बच्चों द्वारा संपत्ति हस्तांतरण के बाद उपेक्षा का सामना
- वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की अनिच्छा
- पड़ोसियों के साथ स्वास्थ्य संबंधी विवादों की बढ़ती घटनाएँ
कोच्ची में आयोजित सुनवाई की मुख्य बातें
केरल राज्य बुजुर्ग आयोग (KSEC) ने कोच्ची के जिला कलेक्टरate में मंगलवार को एक विशेष पैनल सत्र आयोजित किया, जहाँ बुजुर्गों की असुरक्षा और समर्थन प्रणाली की कमी को प्रमुख चिंता के रूप में उजागर किया गया। आयोग ने इस सत्र में सात शिकायतें दर्ज कीं, पाँच व्यक्तिगत और दो संगठनों से।
K. सोमप्रसाद, KSEC के चेयरपर्सन ने बताया कि अधिकांश शिकायतें बच्चों द्वारा बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा और संपत्ति के अनुचित हस्तांतरण से जुड़ी हैं। साथ ही, पड़ोसियों द्वारा पालतू जानवरों की अनुचित देखभाल से स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होने की भी शिकायतें आईं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
केरल में बुजुर्गों की संख्या पिछले दशक में 15% बढ़ी है, जबकि सामाजिक समर्थन नेटवर्क में कमी आई है। राज्य ने 2020 में बुजुर्ग कल्याण अधिनियम पारित किया, परन्तु जमीन पर कार्यान्वयन में कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that unchecked neglect and financial scams against senior citizens can erode trust in public institutions, leading to broader social instability.
"बुजुर्गों की सुरक्षा केवल कानूनी उपायों से नहीं, बल्कि सामुदायिक जागरूकता और सक्रिय पुलिस सहयोग से सुनिश्चित की जा सकती है," कहते हैं डॉ. अनीता राव, वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ।
Did You Know?
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: बुजुर्गों की शिकायतों को कैसे तेज़ी से निपटाया जा सकता है?
उत्तर: विशेषीकृत बुजुर्ग हेल्पलाइन और तेज़ी से कार्रवाई करने वाले पुलिस इकाइयों की स्थापना से प्रक्रिया में सुधार हो सकता है।
प्रश्न 2: क्या बुजुर्गों को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए कोई विशेष योजना है?
उत्तर: राज्य ने 'सुरक्षित निवेश' योजना शुरू की है, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को विश्वसनीय वित्तीय संस्थानों से जुड़ने की सलाह दी जाती है।