भारत ने एशियन खेल 2026 के लिए 20 खिलाड़ी वाली महिला हॉकी टीम घोषित की, जिसमें पद्मश्री प्राप्त savita punia और बिचु देवी खरिबाम गोलकीपर के रूप में शामिल हैं। कप्तान सलिमा टेटे टीम को 2028 लास एंजिल्स ओलम्पिक की दिशा में स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ ले जाएँगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • साविता और बिचु देवी को प्रमुख गोलकीपर चुना गया
  • सलिमा टेटे कप्तान के रूप में टीम का नेतृत्व करेंगी
  • एशियन खेल में स्वर्ण जीतकर 2028 लास एंजेल्स ओलिम्पिक के लिए क्वालिफाई करने का लक्ष्य

जुलाई 10, 2026 को भारतीय महिला हॉकी संघ ने एशियन खेल 2026 के लिए 20 खिलाड़ी वाली एक अनुभवी टीम का चयन किया। इस घोषणा में दो प्रमुख बदलाव हुए – स्ट्राइकर बलेजीत कौर और ब्यूटी डुंगडुंग को शामिल किया गया, जबकि सोनम और अन्नु को बाहर रखा गया। टीम का मुख्य आधार अनुभवी खिलाड़ी और युवा प्रतिभाओं के बीच संतुलित मिश्रण है, जिसका उद्देश्य निरंतर प्रदर्शन और फिटनेस को बनाए रखना है।

पृष्ठभूमि और हालिया उपलब्धियां

पिछले महीने भारतीय महिला टीम ने फील्ड हॉकी फेडरेशन (FIH) नेशंस कप में न्यूज़ीलैंड में जीत हासिल की, जिससे टीम ने पुनर्स्थापना के बाद पुनः शीर्ष स्तर पर अपनी जगह मजबूत की। इस जीत ने टीम को एशियन खेल में स्वर्ण पदक के लिए आशा दी, जहाँ जीतने से सीधे 2028 लास एंजिल्स ओलम्पिक की क्वालिफिकेशन सुनिश्चित होगी।

मुख्य खिलाड़ी और उनकी भूमिका

वेटरन साविता पुनीय, जिन्हें हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित किया गया, गोलकीपर के रूप में अपनी विश्वसनीयता साबित कर चुकी हैं। साथ में बिचु देवी खरिबाम भी द्वि-गोलकीपर पद पर चयनित हुईं, जिससे बचाव में दोहरी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। रक्षा पंक्ति में इशिका चौधरी, सुषिला चनु पुखरम्बाम, ज्योति और लालथनत्लुंगी जैसे नामी खिलाड़ी शामिल हैं, जिन्होंने नेशंस कप में शानदार प्रदर्शन किया। मध्य क्षेत्र में कप्तान सलिमा टेटे के साथ निक्की प्रधान, साक्षी राणा, सुनलेता टोप्पो और दीपिका सोरेंग टीम को रचनात्मकता और गति प्रदान करेंगे। आगे की पंक्ति में लालरेमसियामी, रुतुजा दादासो पिसाल, नवनीत कौर और नई जोड़ी बलेजीत कौर व ब्यूटी डुंगडुंग का आक्रमण शक्ति में बड़ा योगदान होगा।

रणनीतिक महत्व और भविष्य की दृष्टि

कोच सजोर्ड मारिज़ने ने कहा है कि टीम ने हाल के महीनों में अच्छी फ़ॉर्म और फिटनेस दिखाई है, और वह एशियन खेल में चुनौती के लिये पूरी तरह तैयार है। स्वर्ण पदक जीतना न केवल भारत को ओलम्पिक क्वालिफिकेशन दिलाएगा, बल्कि महिला हॉकी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और निवेश भी दिलाएगा। इस प्रकार, एशियन खेल में संभावित सफलता भारतीय खेल नीति और युवा प्रतिभा विकास के लिए एक मॉडल बन सकती है।