भारतीय बाएँ‑हाथी बल्लेबाज़ यस्थिका भाटिया ने इंग्लैंड के विरुद्ध एकमात्र टेस्ट में लॉर्ड्स के प्रसिद्ध मैदान पर पहला महिला शतक बनाया, जिससे भारतीय क्रिकेट में नया अध्याय लिखी गई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • यस्थिका भाटिया ने लॉर्ड्स में पहला महिला टेस्ट शतक बनाया
  • यह शतक भारतीय क्रिकेट में दो प्रमुख मील के पत्थरों को जोड़ता है
  • लॉर्ड्स हॉनर बोर्ड पर उनका नाम अब हमेशा के लिए दर्ज रहेगा

इंग्लैंड बनाम भारत के एकमात्र टेस्ट में, यस्थिका भाटिया ने इतिहास रचा। 12 जुलाई, 2026 को लंदन के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स में खेलते हुए, 24‑वर्षीय बाएँ‑हाथी बल्लेबाज़ ने 145 गेंदों में 100 रन बनाकर पहली महिला क्रिकेटर के रूप में इस पवित्र ग्राउंड पर शतक हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल भारतीय महिलाओं के लिए बल्कि विश्वभर की महिला क्रिकेट के लिए भी एक मील का पत्थर है।

पृष्ठभूमि और महत्व

लॉर्ड्स, जिसे "क्रिकेयर का घर" कहा जाता है, अब तक केवल पुरुषों की टेस्ट शतकों से ही उजागर रहा है। सौरव गांगुली ने 1996 में अपने डेब्यू पर 131 रन बनाए थे, लेकिन महिला क्रिकेट में इस ग्राउंड पर शतक बनाना पहले कभी नहीं हुआ। यस्थिका के इस शतक ने वह अंतराल पाटते हुए, भारतीय बाएँ‑हाथी बल्लेबाज़ों में केवल दूसरे स्थान पर रखा है, और साथ ही वह कृष्णा गाउड के बाद दूसरे महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने लॉर्ड्स हॉनर बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराया।

मैच की स्थिति और यस्थिका की पारी

तीसरे दिन भारत ने पहले दो टेस्टों को मिस कर के इस एकल मुकाबले में वापसी की थी। भारत ने 350 रनों से आगे बढ़ते हुए, यस्थिका को 99 पर लंच ब्रेक पर रोक दिया गया। ब्रेक के बाद उन्होंने केवल छह गेंदों में शतक पूरा किया, अंतिम गेंद पर इसी वोंग की गेंद को कवर क्षेत्र में धक्का देते हुए शतक हासिल किया। उनका यह शतक न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि थी, बल्कि टीम के बड़े स्कोर में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

तकनीकी विश्लेषण

यस्थिका ने सॉफ़ी एक्लेस्टोन और मैडि विलियर्स दोनों के खिलाफ अपने पैरों का इस्तेमाल किया, साथ ही लॉरेन फाइलर के छोटे गेंदों को भी मारते हुए संतुलन बनाये रखा। उनका आधे-ऑफ़ साइड ड्राइव और तेज़ पुल दोनों ही शॉट्स ने उन्हें निरंतर रनों की धारा में मदद की। 86 गेंदों में पचास तक पहुँचने के बाद, उन्होंने आक्रमणात्मक खेल में बदलाव किया, जिससे शतक की ओर उनका मार्ग तेज़ हो गया।

भविष्य की संभावनाएँ

यह शतक भारतीय महिला क्रिकेट के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है। युवा खिलाड़ियों के लिए यह एक प्रेरणा है कि वे भी ऐसी प्रतिष्ठित ग्राउंड पर अपना नाम लिख सकते हैं। साथ ही, इस उपलब्धि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला टेस्ट क्रिकेट को अधिक ध्यान मिलने की संभावना बढ़ी है, जिससे भविष्य में अधिक टेस्ट श्रृंखलाएँ आयोजित हो सकती हैं।