अदिले सुमरीवाला ने बताया कि पिछले चार महीनों में 25 से अधिक राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे हैं, जिसका कारण विकेंद्रीकृत प्रशिक्षण शिविर, विदेशी कोचों की भागीदारी और नीरज चोपड़ा जैसी प्रेरणा है। उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और डोपिंग मुद्दे पर अपनी रणनीति भी साझा की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- विकेंद्रीकृत प्रशिक्षण मॉडल ने रिकॉर्ड तोड़ने की लहर शुरू की
- विदेशी कोचों और निजी संस्थानों की भागीदारी से बेंच स्ट्रेंथ बढ़ी
- डोपिंग को अपराधीकरण की दिशा में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं
रिकॉर्ड तोड़ने की लहर— पिछले चार महीनों में भारत में 25 से अधिक राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे हैं, जो पिछले दो दशकों में देखी गई सबसे तेज़ गति है। सुमरीवाला ने बताया कि यह केवल भाग्य नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित बदलाव का परिणाम है, जिसमें एथलेटिक्स के प्रत्येक वर्ग में गहरी प्रतिस्पर्धा विकसित हुई है।
विकेंद्रीकृत प्रशिक्षण मॉडल
पेरिस ओलंपिक के बाद भारतीय एथलेटिक्स ने राष्ट्रीय शिविरों को 300‑दिन तक रहने वाले मोड से हटाकर राज्य और निजी संस्थानों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए। रिलायंस, जेएसडब्ल्यू और ओडिशा, तमिलनाडु जैसे राज्य विदेशी कोचों को लाकर एथलीटों को उनके घर के पास ही उन्नत सुविधाएँ प्रदान कर रहे हैं। इस बदलाव ने एथलीटों को “जहाँ चाहें, वहाँ ट्रेन” की स्वतंत्रता दी, जबकि रिले जैसी टीम इवेंट्स को राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित किया गया।
डोपिंग संकट का समाधान
सुमरीवाला ने कहा कि युवा एथलीटों में डोपिंग का मुद्दा अब “आतंक” बन चुका है और इसे अपराधीकरण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। सात वर्षों से वह इस दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे न केवल खिलाड़ियों की सुरक्षा होगी, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि भी सुधरेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कोचों को एथलीटों को “स्वयं को सुरक्षित रखें” की शिक्षा देना आवश्यक है, ताकि चोटों से बचा जा सके।
भविष्य की रणनीति और विश्व एथलेटिक्स में भूमिका
आगामी एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स को देखते हुए सुमरीवाला ने कहा कि भारतीय एथलीट अभी अपनी शिखर स्थिति तक नहीं पहुँचे हैं। यूरोपीय प्रतिस्पर्धा प्रणाली को अपनाते हुए, वे दो‑तीन प्रमुख इवेंट्स में एथलीटों को भागीदारी अनिवार्य कर रहे हैं, जिससे अनुभव और निरंतर सुधार सुनिश्चित हो सके। विश्व एथलेटिक्स में संभावित अध्यक्ष पद के लिए उन्होंने एक स्पष्ट विज़न स्टेटमेंट की माँग की, जिसमें अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और कैरिबियन जैसे विविध क्षेत्रों को समान अवसर प्रदान करना शामिल है। भारत में 650 जिलों में कोचों की कमी को दूर करने के लिए एक व्यापक इकोसिस्टम बनाना प्राथमिक लक्ष्य है।
सुमरीवाला का यह संदेश न केवल भारतीय एथलेटिक्स की वर्तमान सफलता को रेखांकित करता है, बल्कि आने वाले वर्षों में विश्व स्तर पर भारत को एक प्रमुख खिलाड़ी बनाकर दिखाने की दिशा में एक रोडमैप भी प्रस्तुत करता है।