मिराबाई चानू ने बताया कि उन्होंने दो दिन तक कुछ नहीं खाया था, फिर भी उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलोग्राम का कुल वज़न उठाकर कमनवेल्थ खेलों 2026 में स्वर्ण पदक जित लिया।
मुख्य बातें
- मिराबाई ने प्रतियोगिता से दो दिन पहले कोई भोजन नहीं किया।
- 190 किलोग्राम का कुल वज़न उठाकर स्वर्ण पदक और रिकॉर्ड बनाया।
- पहले दो प्रयासों में असफलता के बावजूद जीत हासिल की।
ग्लासगो में आयोजित कमनवेल्थ खेलों 2026 में भारोत्तोलन की महिला 48 किलोग्राम श्रेणी में मिराबाई चानू ने भारत का पहला स्वर्ण पदक जीता। वह दो दिन तक बिना खाए रही थीं, जैसा कि उन्होंने पत्रकारों से इंटरव्यू में खुलकर कहा।
टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक विजेता मिराबाई ने शुरुआती स्नैच और क्लीन‑एंड‑जर्क दोनों में पहला प्रयास चूकने के बाद भी कुल 190 किलोग्राम का रिकॉर्ड स्थापित किया। यह उनका लगातार तीसरा कमनवेल्थ खेलों का पदक और भारत का ही तीसरा स्वर्ण पदक था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय भारोत्तोलन ने पिछले दस वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर उल्लेखनीय प्रगति की है। 2010 में सविता राव ने पहला स्वर्ण जीतने के बाद से, मिराबाई चानू ने 2014, 2018 और अब 2026 में लगातार पदक हासिल करके इस खेल को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि मिराबाई का दो‑दिन का उपवास और फिर भी रिकॉर्ड‑तोड़ प्रदर्शन युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, साथ ही यह भारत की आगामी एशियन खेलों की तैयारी में आत्मविश्वास बढ़ाता है।
"ऐसे कठिन शारीरिक परिश्रम के बाद भी दो दिन का उपवास एथलीट की मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है," कहते हैं खेल विशेषज्ञ डॉ. राजेश शर्मा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या दो दिन बिना खाए रहना सामान्य है?
उत्तर: यह अत्यंत असामान्य है और केवल अत्यधिक प्रशिक्षित एथलीट ही इसे संभाल सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या मिराबाई अगली एशियन खेलों में भी प्रतिस्पर्धा करेंगी?
उत्तर: उन्होंने पहले ही पुष्टि कर दी है कि वह एशियन खेलों में भाग लेंगी और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देंगी।