कोलकाता मेट्रो ने पर्पल लाइन के तहत टनल निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया। टनल बोरिंग मशीन ‘दुर्गा’ ने विक्टोरिया स्टेशन पर सफलतापूर्वक ब्रेकथ्रू किया, जिससे 1.7 किमी की भूमिगत मार्ग पूर्ण हुआ। यह उपलब्धि शहर के सार्वजनिक परिवहन के भविष्य को तेज़, सुरक्षित और सतत बनाती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • TBM “दुर्गा” ने विक्टोरिया स्टेशन पर टनल ब्रेकथ्रू किया
  • पहला 1.7 किमी भूमिगत टनल सफलतापूर्वक पूरा हुआ
  • परियोजना का लक्ष्य 14 किमी की पर्पल लाइन पूरी करना है

कोलकाता मेट्रो ने जुड़ाव के एक नया अध्याय लिखा, जब 90 मीटर लंबी, 650 टन वजन वाली टनल बोरिंग मशीन (TBM) दुर्गा ने सुबह 10.30 बजे विक्टोरिया म्यूजियम के पास स्थित विक्टोरिया स्टेशन में अंतिम बाधा को तोड़ दिया। यह क्षण न केवल इंजीनियरों के लिए, बल्कि पूरे शहर के लिए गर्व का कारण बना, क्योंकि इस सफलता ने पर्पल लाइन के पहले चरण के भूमिगत टनलिंग को पूर्णता तक पहुंचा दिया।

परियोजना की पृष्ठभूमि

पर्पल लाइन, जिसे जोका‑एस्प्लानेड मेट्रो लाइन के रूप में भी जाना जाता है, 2009 में प्रस्तावित हुई थी। शुरुआती सालों में भूमि अधिग्रहण में कठिनाइयाँ, अंशिक कार्य‑शुरूआत और बोवबजार में कई टनल ढहने की घटनाओं ने इसे एक चुनौतीपूर्ण परियोजना बना दिया। इन बाधाओं के बावजूद, कोलकाता मेट्रो ने दृढ़ संकल्प के साथ कार्य जारी रखा और इस साल 14 किमी के कुल मार्ग को दो टनल ट्यूब में पूरा करने की योजना बना रखी है।

तकनीकी विवरण और “दुर्गा” का सफर

TBM दुर्गा ने 17 मीटर नीचे, किडरपुर में स्थित सेंट थॉमस बॉयज़ स्कूल के पास से अपनी यात्रा शुरू की। पिछले 365 दिनों में इसने 1.7 किमी लंबा टनल सुरक्षित रूप से खोदा, जिसमें फोर्ट विलियम और पीटीएस स्टेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बिना कोई सतही क्षति के पार किया। मशीन जर्मनी की Herrenknecht कंपनी द्वारा निर्मित प्रमुख घटकों को तमिलनाडु में असेंबल कर 'मेक‑इन‑इंडिया' पहल का हिस्सा बनाकर तैयार की गई है।

भविष्य की योजना और प्रभाव

दुर्गा द्वारा खोदा गया टनल अब दो ट्यूब प्रणाली के 2.65 किमी हिस्से में से 1.7 किमी को कवर करता है। अगले चरण में दुर्गा को विक्टोरिया स्टेशन से पुनः लॉन्च किया जाएगा, जिससे पर्क्ल स्ट्रीट तक शेष 900 मीटर टनल पूरा होगा। इस पूर्णता से कोलकाता के नागरिकों को तेज़, कम भीड़भाड़ वाला और पर्यावरण‑अनुकूल सार्वजनिक परिवहन मिलेगा, जिससे शहर की गैस उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही, इस सफलता ने भारत में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचा निर्माण में स्वदेशी तकनीक की क्षमता को सिद्ध किया है।