यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सामाजिक नेटवर्क पर गैर‑आसक्तिपूर्ण मोड लागू करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। यह कदम प्लेटफ़ॉर्म को आकर्षक फीचर हटाकर युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • EU ने सोशल मीडिया पर "नॉन‑ऐडिक्टिव यूथ मोड" लागू करने की मांग की।
  • उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 13 वर्ष की आयु सीमा का समर्थन किया।
  • फेसबुक, टिकटॉक और इंस्टाग्राम को आकर्षक फीचर हटाने का निर्देश मिला।

यूरोपीय संघ ने हाल ही में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों—फेसबुक, टिकटॉक और इंस्टाग्राम—को अपने उपयोगकर्ता‑इंटरफ़ेस को पुनः डिज़ाइन करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इस दिशा‑निर्देश का मुख्य उद्देश्य “आसक्तिपूर्ण” कार्यात्मकताओं को समाप्त कर, विशेषकर 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करना है।

पृष्ठभूमि और नियामक ढांचा

EU के डिजिटल सिंगल मार्केट को सुदृढ़ करने की निरंतर कोशिशें, पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख विधेयकों में परिलक्षित हुई हैं, जैसे कि डिजिटल सर्विसेस एक्ट (DSA) और डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA)। इन कानूनों ने प्लेटफ़ॉर्मों को पारदर्शिता, सामग्री मॉडरेशन और उपयोगकर्ता डेटा की सुरक्षा के लिये कड़ी बाध्यताएँ निर्धारित की हैं। अब “नॉन‑ऐडिक्टिव यूथ मोड” की माँग इस नियामक प्रवाह का नवीनतम चरण है, जो विशेष रूप से युवा वर्ग के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है।

उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भूमिका

EU की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सार्वजनिक रूप से 13 वर्ष की आयु सीमा को समर्थन दिया, यह कहते हुए कि यह “डिजिटल सुरक्षा का बुनियादी मानक” है। उनका यह बयान कई सदस्य‑राज्यों में समान विधायी पहल को प्रेरित कर रहा है, जहाँ सरकारें अपने राष्ट्रीय स्तर पर भी समान आयु‑सीमा लागू करने की तैयारी कर रही हैं।

सोशल मीडिया कंपनियों की प्रतिक्रिया

फेसबुक, टिकटॉक और इंस्टाग्राम ने अभी तक आधिकारिक तौर पर सभी “आसक्तिपूर्ण” फीचर हटाने की पुष्टि नहीं की है, परंतु उन्होंने कहा है कि वे “उपयोगकर्ता‑अनुभव को बेहतर बनाने” के लिए “जिम्मेदार नवाचार” करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्लेटफ़ॉर्मों को एल्गोरिदमिक फ़ीड को सीमित करना, समय‑सीमा अलर्ट लागू करना और बच्चों के लिए कम‑उत्तेजक इंटरफ़ेस प्रदान करना पड़ेगा।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि EU की माँगें सफल होती हैं, तो यह न केवल यूरोप में बल्कि वैश्विक स्तर पर डिजिटल नीति में एक नया मानक स्थापित कर सकती है। इस प्रकार की नियामक पहल से विज्ञापन मॉडल, कंटेंट रैंकिंग और उपयोगकर्ता सहभागिता में गहरा परिवर्तन आएगा, जिससे युवा जनसंख्या के डिजिटल स्वास्थ्य में दीर्घकालिक सुधार की उम्मीद की जा रही है।