केंद्र सरकार ने मोबाइल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹62,500 करोड़ के विशाल बजट वाली 'मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (MPMS) को मंजूरी दी है। इस योजना का लक्ष्य भारत को दुनिया का प्रमुख विनिर्माण केंद्र बनाना और 60,000 नए रोजगार पैदा करना है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्र सरकार ने ₹62,500 करोड़ के बजट वाली नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दी।
  • यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू होगी।
  • योजना से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन की उम्मीद है।
  • स्थानीय स्तर पर पुर्जों के उपयोग और डिजाइन/R&D पर अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।

भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को हरी झंडी दे दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए ₹62,500 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। यह कदम भारत के 'मेक इन इंडिया' विजन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के उद्देश्य से उठाया गया है, विशेष रूप से तब जब पिछली PLI योजना का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।

विदेशी दिग्गजों के साथ-साथ स्वदेशी ब्रांडों पर भी ध्यान

यह नई योजना केवल Apple और Samsung जैसे वैश्विक दिग्गजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक मुख्य उद्देश्य भारतीय ब्रांडों को 'तकनीकी संप्रभुता' (Technological Sovereignty) प्रदान करना है। सरकार चाहती है कि भारतीय कंपनियां केवल असेंबली यूनिट न रहकर, डिजाइन और अनुसंधान (R&D) में भी वैश्विक स्तर पर मुकाबला कर सकें। योजना के तहत, भारतीय ब्रांडों को भारत में डिजाइन और अनुसंधान करने के लिए बिक्री पर 3% का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रोत्साहन संरचना और आर्थिक प्रभाव

MPMS के तहत, निर्माताओं को उनकी पात्र बिक्री के आधार पर 2.25% से 5% तक की दर से प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अलावा, जो कंपनियां स्थानीय स्तर पर पुर्जे (components) जुटाएंगी, उन्हें 1.5% तक का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। MeitY का अनुमान है कि इस योजना के माध्यम से भारत में हैंडसेट उत्पादन का मूल्य बढ़कर ₹39,00,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो देश के निर्यात और जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

रोजगार और भविष्य की राह

आर्थिक विकास के साथ-साथ, यह योजना सामाजिक प्रभाव भी पैदा करेगी। सरकार का अनुमान है कि इस पांच साल के कार्यकाल के दौरान लगभग 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होकर 2030-31 तक चलेगी, जिससे भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में स्थिति और भी मजबूत होगी।