राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के एक हालिया सर्वेक्षण से पता चलता है कि घरेलू काम और बच्चों की देखभाल के कारण लगभग 69% शहरी महिलाएं नौकरी से बाहर हो जाती हैं

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के एक हालिया सर्वेक्षण से पता चलता है कि घरेलू काम और बच्चों की देखभाल के कारण लगभग 69% शहरी महिलाएं नौकरी से बाहर हो जाती हैं। यह सर्वेक्षण भारत के 46 बड़े शहरों में किया गया था, जिनमें एक लाख से अधिक जनसंख्या है। इस सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि शहरी महिलाओं को नौकरी में कम वेतन मिलता है, जो पुरुषों की तुलना में 23% कम है। हालांकि, शहरी महिलाओं की नौकरी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिनमें से 65% महिलाएं वेतनभोगी नौकरी में हैं। इस सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि शहरी महिलाओं की नौकरी में भागीदारी अलग-अलग शहरों में भिन्न होती है। कुछ शहरों में महिलाओं की नौकरी में भागीदारी अधिक है, जबकि अन्य शहरों में कम है। इस सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि शहरी महिलाओं को नौकरी में कम वेतन मिलने के कारण वे नौकरी से बाहर हो जाती हैं। इस सर्वेक्षण के परिणामों से यह पता चलता है कि शहरी महिलाओं की नौकरी में भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार को नीतियों में सुधार करना होगा और महिलाओं को नौकरी में समान वेतन दिलाने के लिए काम करना होगा।