तमिलनाडु सरकार ने कांचीपुरम के परंदूर में प्रस्तावित दूसरे हवाई अड्डे की योजना को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। किसानों के विरोध और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस निर्णय की घोषणा की है।

  • तमिलनाडु सरकार ने परंदूर हवाई अड्डा परियोजना को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
  • किसानों का भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय नुकसान का डर विरोध का मुख्य कारण था।
  • सरकार अब चेन्नई के लिए एक वैकल्पिक स्थान की तलाश करेगी।
  • मीनांबाक्कम हवाई अड्डे की क्षमता बढ़ाने के लिए टर्मिनल 5 का निर्माण जारी रहेगा।

चेन्नई के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद परियोजनाओं में से एक, परंदूर हवाई अड्डा, अब इतिहास के पन्नों में सिमट गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य विधानसभा में घोषणा की कि सरकार इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाएगी और चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे के लिए एक वैकल्पिक स्थल की तलाश करेगी। यह निर्णय उन किसानों के निरंतर विरोध के बाद आया है जो अपनी आजीविका और पर्यावरण के विनाश को लेकर चिंतित थे।

परंदूर परियोजना के विरोध के मुख्य कारण

परंदूर परियोजना को शुरू से ही कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। 2022 में जब इस योजना को पुनर्जीवित किया गया था, तभी से एकानपुरम सहित आसपास के गांवों के किसान भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे थे। किसानों का तर्क था कि इस परियोजना से उनकी आजीविका पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। इसके अलावा, पर्यावरणविदों ने भी गंभीर चेतावनी दी थी कि प्रस्तावित स्थल कई जल निकायों से घिरा हुआ है, और हवाई अड्डे का निर्माण न केवल आसपास के गांवों को जलमग्न कर सकता है, बल्कि चेन्नई में बाढ़ के खतरे को भी बढ़ा सकता है।

परियोजना का रद्द होना भूमि अधिकारों और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाता है।

परियोजना की प्रगति और अधूरा कार्य

हालांकि यह परियोजना रद्द हो गई, लेकिन पिछले चार वर्षों में सरकार ने काफी कुछ हासिल कर लिया था। कुल 5,846 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी, जिसमें से 1,802 एकड़ का अधिग्रहण पूरा हो चुका था। नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी और साइट क्लीयरेंस भी मिल चुकी थी, लेकिन पर्यावरणीय मंजूरी और निजी ऑपरेटरों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया अभी भी लंबित थी।

क्यों चेन्नई को एक दूसरे हवाई अड्डे की आवश्यकता है?

चेन्नई के लिए एक नए हवाई अड्डे की आवश्यकता केवल यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए भी है। पिछले दशक में, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों ने अपने निजी प्रबंधित हवाई अड्डों के माध्यम से चेन्नई को पीछे छोड़ दिया है। बेंगलुरु ने पेरिस, एम्स्टर्डम और टोक्यो जैसे अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए सीधी उड़ानें जोड़कर एक नया मानक स्थापित किया है, जबकि चेन्नई अभी भी इन कनेक्टिविटी चुनौतियों से जूझ रहा है।

बेंज़ोम मीडिया विश्लेषण: चेन्नई हवाई अड्डे का भविष्य

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, चेन्नई के मौजूदा मीनांबाक्कम हवाई अड्डे की क्षमता बढ़ाने पर अब अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वर्तमान में यह हवाई अड्डा सालाना 30 मिलियन यात्रियों को संभालता है। टर्मिनल 3 के निर्माण के बाद यह क्षमता 35 मिलियन हो जाएगी, और यदि टर्मिनल 5 का निर्माण पूरा हो जाता है, तो यह क्षमता बढ़कर 55 मिलियन यात्री प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है।

Did You Know?: चेन्नई का मीनांबाक्कम हवाई अड्डा कभी भारत का तीसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा हुआ करता था, जिसे अब बेंगलुरु और हैदराबाद ने पीछे छोड़ दिया है।

Frequently Asked Questions

1. परंदूर हवाई अड्डा क्यों रद्द किया गया?
मुख्य रूप से किसानों के तीव्र विरोध और संभावित पर्यावरणीय खतरों (जैसे बाढ़ का खतरा) के कारण इसे रद्द किया गया है।

2. अब चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे के लिए क्या होगा?
तमिलनाडु सरकार अब एक नए वैकल्पिक स्थान की तलाश करेगी जो किसानों और पर्यावरण को कम से कम प्रभावित करे।