नरसरावपेट में 17 जुलाई को 2,000 करोड़ रुपये के लोन मेले का आयोजन होगा, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन और मुख्यमंत्री नंदनबु नायडू शामिल होंगे। लगभग 3,000 लाभार्थियों को 20 केंद्र सरकार योजनाओं के तहत ऋण प्रदान किए जाएंगे।
गुंटूर: राष्ट्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नंदनबु नायडू के उपस्थिति में 17 जुलाई को नरसरावपेट में एक विशाल ऋण मेला आयोजित किया जाएगा। नरसरावपेट सांसद लवु श्रीकृष्णा देवरायालु ने इस पहल की घोषणा की, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, किसान, छोटे व्यापारियों और उभरते उद्यमियों को संस्थागत वित्त तक आसान पहुँच प्रदान करना है।
मेला का पैमाना और अपेक्षित प्रभाव
इस कार्यक्रम में लगभग 2,000 करोड़ रुपये के ऋण को 20 विभिन्न केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत वितरित करने की योजना है। पलनडु जिले के 28 मंडलों से लगभग 3,000 पात्र लाभार्थियों की भागीदारी अपेक्षित है, जो कृषि, उद्यमिता, महिलाओं के समूह और आदिवासी भूमि मालिकों को लक्षित करेगा। इस पहल से निजी सूदखोरों पर निर्भरता घटेगी और बैंकिंग प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा।
पिछले दो वर्षों की तैयारियां
सदस्य प्रतिनिधि ने बताया कि उन्होंने दो वर्षों से वित्त मंत्री के साथ इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है। कई पात्र लोगों को बैंक ऋण प्राप्त करने में कठिनाई, जागरूकता की कमी और जटिल प्रक्रियाओं के कारण निजी उधारकर्ताओं की ओर रुख करना पड़ता है। इस मेला के माध्यम से इन बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष जागरूकता शिविर, डिजिटल आवेदन मंच और स्थानीय बैंकों के प्रतिनिधियों की सीधी सहभागिता होगी।
महिला समूह और आदिवासी किसानों के लिए नई पहल
मेला में 28 मंडलों में क्लस्टर-आधारित महिला समूहों को सशक्त करने के लिये विशेष प्रावधान किए जाएंगे, जिससे उन्हें सामूहिक ऋण और प्रशिक्षण सुविधा मिल सकेगी। साथ ही, आंध्र प्रदेश में पहली बार, योग्य आदिवासी भूमि मालिकों को उनके कृषि भूमि के विरुद्ध बैंक ऋण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनकी आय में स्थायी सुधार की संभावना होगी।
विशेषज्ञों की दृष्टि
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की एकीकृत ऋण मेला न केवल स्थानीय आर्थिक विकास को तेज करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को भी साकार करेगा। यदि सफल रहा, तो यह मॉडल अन्य पिछड़े जिलों में दोहराया जा सकता है, जिससे ग्रामीण भारत में वित्तीय साक्षरता और संस्थागत निवेश में वृद्धि होगी।
नरसरावपेट में इस मेले की सफलता से आंध्र प्रदेश सरकार की विकास नीति में नई ऊर्जा का संचार होगा और ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठेगा।