पेट्रोलियम मंत्री हर्दीप पुरी ने ई‑20 ईंधन नीति पर उठाए गए सवालों को ‘डर फैलाने’ का आरोप लगाते हुए पिछले साल की एलपीजी घबराहट से तुलना की। उन्होंने बताया कि बायोफ्यूल योजना ने विदेशी मुद्रा में 1.9 लाख करोड़ रुपये बचाए हैं और होर्मुज‑संबंधी अस्थिरता के दौर में आयात निर्भरता घटाई है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रमुख हर्दीप पुरी ने हाल ही में NDTV के साथ एक साक्षात्कार में ई‑20 बायोफ्यूल नीति को लेकर उठाए गए प्रश्नों को "जाने‑बूझकर डर फैलाने" का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस नीति पर उठी आलोचना का समय‑संकट के बजाय उसकी सामग्री पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ई‑20 नीति और पिछले एलपीजी पैनिक की तुलना

मंत्री ने बताया कि 2023 में भारत में एलपीजी की कीमतों में अचानक उछाल के बाद उत्पन्न हुई घबराहट को "निर्मित" कहा गया था, और उसी तरह इस साल ई‑20 बायोफ्यूल को लेकर भी समान भय‑प्रवणता देखी जा रही है। उन्होंने कहा, "जब तक हम वास्तविक आँकड़ों और दीर्घकालिक लाभों पर नहीं रुकते, तब तक ऐसी आवाज़ें केवल नकारात्मक माहौल बनाती हैं।"

बायोफ्यूल की आर्थिक और रणनीतिक महत्ता

भारत ने 2022‑23 वित्तीय वर्ष में बायोफ्यूल को प्राथमिक ऊर्जा स्रोत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। पुरी ने बताया कि बायो‑डिज़ल के मिश्रण से देश ने अनुमानित ₹1.9 लाख करोड़ विदेशी मुद्रा बचाई है। यह बचत विशेष रूप से मध्य‑पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य की अस्थिरता के कारण बढ़ती तेल कीमतों से बचाव के रूप में सामने आई है।

इसके अलावा, बायोफ्यूल नीति ने आयात पर निर्भरता को घटाने में मदद की है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पुरी ने कहा, "जब हम घरेलू उत्पादन को बढ़ाते हैं, तो हम वैश्विक बाजार की उथल‑पुथल से कम प्रभावित होते हैं।"

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ

ई‑20 नीति को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संघों ने अलग‑अलग राय व्यक्त की है। कुछ ने कहा कि बायोफ्यूल उत्पादन के लिए फसल के उपयोग से खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, जबकि अन्य ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अवसर माना है। पुरी ने इन विविध आवाज़ों को "सामान्य लोकतांत्रिक बहस" कहा, परन्तु उन्होंने यह भी कहा कि "अधिकांश आलोचनाएँ तथ्य‑आधारित नहीं हैं, बल्कि भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ हैं।"

भविष्य की दिशा

मंत्री ने बताया कि सरकार बायोफ्यूल के लिए नई तकनीकों, जैसे जीन‑संशोधित फसलें और अल्गे‑आधारित बायो‑डिज़ल, को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। यह कदम न केवल ईंधन की कीमतों को स्थिर रखेगा, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव को भी घटाएगा। पुरी ने कहा, "हमारा लक्ष्य 2030 तक बायोफ्यूल को कुल पेट्रोलियम उपयोग का 20 % बनाना है, और यह लक्ष्य आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक रूप से सतत है।"

समग्र रूप से, हर्दीप पुरी ने NDTV के प्रश्नों को "डर‑फैलाने" की रणनीति के रूप में खारिज किया, जबकि बायोफ्यूल नीति के दीर्घकालिक लाभों को रेखांकित किया। यह विवाद इस बात का संकेत है कि भारत की ऊर्जा नीति में आर्थिक सुरक्षा, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक स्वीकृति के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है।