तमिलनाडु में नई खुदाई प्रतिबंधों के कारण कई निर्माण परियोजनाओं में देरी हो रही है। रियल एस्टेट डेवलपर्स के संघ CREDAI ने सरकार से एक प्रभावी तंत्र स्थापित करने की मांग की है, ताकि निवेशकों के जोखिम कम हो सकें।
तमिलनाडु की निर्माण उद्योग ने हाल ही में लागू किए गए खुदाई प्रतिबंधों को लेकर चिंता व्यक्त की है। कन्टिनेंटल रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CREDAI) के अनुसार, इन प्रतिबंधों ने कई बड़े आवासीय और वाणिज्यिक प्रोजेक्ट्स को रोक दिया है, जिससे डिलिवरी समय‑सीमा में गंभीर गिरावट आई है।
पृष्ठभूमि और नियमों का परिचय
2023 के अंत में तमिलनाडु सरकार ने जलस्रोत संरक्षण और भूमिगत जल स्तर की गिरावट को रोकने के उद्देश्य से एक नई खुदाई नीति लागू की। इस नीति के तहत, 30 मीटर से अधिक गहराई में खुदाई करने वाले सभी ठेकेदारों को विशेष अनुमति लेनी पड़ती है, और कई क्षेत्रों में खुदाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कदम पर्यावरणीय संगठनों की सिफारिशों पर आधारित था, लेकिन रियल एस्टेट क्षेत्र ने इसे अचानक और बिना पर्याप्त परामर्श के लागू माना।
प्रभावित परियोजनाएँ और आर्थिक नुकसान
CREDAI के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में वर्तमान में लगभग 150 बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स खुदाई प्रतिबंधों के कारण स्थगित या धीमे हो रहे हैं। इन परियोजनाओं में शहरी आवासीय कॉम्प्लेक्स, मॉल, और औद्योगिक पार्क शामिल हैं। डेवलपर्स का दावा है कि देरी के कारण उनके निवेश पर रिटर्न घट रहा है, और अनुबंधात्मक दायित्वों का उल्लंघन होने की संभावना बढ़ रही है। आर्थिक तौर पर, अनुमानित नुकसान सालाना लगभग 2,500 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।
CREDAI की मांग और संभावित समाधान
समिति ने सरकार को एक "प्रभावी तंत्र" स्थापित करने की अपील की है, जिसमें शामिल हैं:
- एक स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल का गठन, जो प्रत्येक खुदाई अनुरोध की तकनीकी वैधता का शीघ्र मूल्यांकन कर सके।
- परियोजना‑विशिष्ट सॉलिडिटी और जलस्रोत अध्ययन को तेज़ी से मंजूरी देने की प्रक्रिया।
- स्थगित परियोजनाओं के लिए वित्तीय राहत या कर छूट जैसी नीतियों का परिचय।
इन उपायों से न केवल विकासकों को जोखिम कम होगा, बल्कि राज्य की बुनियादी ढांचा वृद्धि भी तेज़ होगी।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे का मार्ग
तमिलनाडु की जल संसाधन विभाग ने बताया कि यह नीति पर्यावरणीय सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, पर साथ ही वह विकासकों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए तैयार है। अधिकारी ने कहा कि "एक कार्यात्मक संवाद मंच" स्थापित किया जाएगा, जहाँ डेवलपर्स, पर्यावरणीय विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी मिलकर संभावित समाधान पर चर्चा करेंगे।
विशेषज्ञों की राय
शहरी नियोजन विशेषज्ञ डॉ. रजनीश कुमार का मानना है कि "स्थायी विकास के लिए पर्यावरणीय नियमों और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है"। उन्होंने सुझाव दिया कि तकनीकी रूप से उन्नत खुदाई तकनीकों, जैसे ट्रीटेड वॉटर रीसायक्लिंग, को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे जलस्रोत पर दबाव घटे और निर्माण गति बनी रहे।
समग्र रूप से, तमिलनाडु की खुदाई प्रतिबंध नीति ने रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़ी धूमिलता पैदा कर दी है, परन्तु यह भी स्पष्ट है कि एक पारस्परिक समझौता और नियामक लचीलापन दोनों पक्षों को लाभ पहुंचा सकता है।