अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इरान‑विरोधी बयान के बाद भारतीय शेयर बाजार में तीव्र गिरावट आई, जिससे निवेशकों के लगभग 9 लाख करोड़ रुपये की क्षति हुई। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में 6 % से अधिक उछाल और रुपये की ऐतिहासिक गिरावट ने बाजार के माहौल को और बिगाड़ दिया।
नई दिल्ली (08 जुलाई 2026) – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इरान पर कठोर बयान ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में तनाव का नया दौर शुरू कर दिया है। ट्रम्प ने कहा कि इरान के साथ कोई भी वार्ता अब संभव नहीं है, जिससे मध्य‑पूर्व में संभावित सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई। इस बयान का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा, जहाँ सेंसेक्स 1,900 अंक और निफ्टी 23,800 स्तर तक गिरकर 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी क्षति हुई।
बाजार में गिरावट के चार मुख्य कारण
1. ट्रम्प का बयान और भू‑राजनीतिक तनाव – इरान‑अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों के मन में भय उत्पन्न किया। ट्रम्प ने इरान को "भ्रष्ट" और "बिना किसी समझौते के" कहा, जिससे एशिया‑पैसिफिक में जोखिम प्रीमियम तेज़ हो गया।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल – इरान पर संभावित प्रतिबंधों की खबरों के साथ तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल के करीब पहुँच गईं, जिससे 6 % तक की वृद्धि दर्ज हुई। भारत 85 % से अधिक तेल आयात करता है, इसलिए तेल‑कीमतों में इस उछाल ने महंगाई के दबाव को और तीव्र कर दिया।
3. डॉलर की मजबूती और रुपये में रिकॉर्ड गिरावट – अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों ने अमेरिकी डॉलर को "सेफ हेवन" माना, जिससे डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ और भारतीय रुपये की कीमत 95.55 प्रति डॉलर तक गिर गई। कमजोर रुपये ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को भारतीय इक्विटीज़ से बड़े पैमाने पर निकास करने को प्रेरित किया।
4. इंडिया VIX में तीव्र उछाल – बाजार में अस्थिरता को मापने वाला VIX 26.03 % की वृद्धि के साथ 14.68 पर बंद हुआ, जबकि इंट्राडे में 15.16 तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि निवेशकों की जोखिम सहनशीलता नाटकीय रूप से घट गई है।
सेक्टर‑वाइज़ प्रभाव
बाजार गिरावट के दौरान पीएसयू बैंक, रियल एस्टेट, ऑटो और FMCG सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित हुए। मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और प्रमुख सार्वजनिक बैंकों के शेयरों में दो‑तीन प्रतिशत की गिरावट देखी गई। निफ्टी में इन सेक्टरों का योगदान 2‑2.5 % तक नीचे गिरा, जिससे समग्र सूचकांक पर दबाव बना रहा।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
अमेरिकी शेयर बाजार में भी उसी दिन सेमीकंडक्टर और बड़े टेक कंपनियों (इंटेल, एएमडी) के शेयरों में 6‑9 % की गिरावट दर्ज हुई। दक्षिण कोरिया के कोस्पी सूचकांक में 5 % से अधिक की गिरावट देखी गई, जो दर्शाता है कि ट्रम्प के बयान का प्रभाव एशिया‑पैसिफिक तक फैला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य‑पूर्व में सैन्य टकराव की संभावना बनी रहती है, तो तेल की कीमतें और भी ऊँची हो सकती हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई और मौद्रिक नीति के दबाव बढ़ेंगे। इस बीच, भारतीय निवेशकों को जोखिम‑प्रबंधन के उपाय अपनाने और पोर्टफोलियो में विविधता लाने की सलाह दी जा रही है।