तमिलनाडु के वडिपट्टि में कपड़ा उद्योग के कामगारों ने बताया कि उनका कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) 2018 से 2024 तक जमा नहीं किया गया। उन्होंने EPFO के आयुक्त के सामने औपचारिक याचिका दायर कर कंपनी के प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की।
तमिलनाडु के मदुरै जिले के वडिपट्टि में स्थित एक वस्त्र-संबंधित इकाई के कामगारों ने कंपनी द्वारा उनके वेतन से कटे हुए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को छह वर्षों तक जमा न करने का आरोप लगाया। इस मामले को उजागर करने के लिए उन्होंने हाल ही में EPFO के आयुक्त के समक्ष औपचारिक याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता का दावा और कानूनी आधार
याचिका के मुख्य दायरकर्ता एम. सेथुरमन ने कहा कि 2018 से लेकर अगस्त 2024 तक उनके यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) में कोई जमा नहीं दिखा। उन्होंने बताया कि कंपनी ने नियमित रूप से वेतन से EPF की कटौती की, परंतु वह रक़म EPFO को नहीं भेजी गई। इस अनियमितता के खिलाफ उन्होंने कई मौखिक शिकायतें कीं, परन्तु कंपनी ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया।
कानूनी कार्रवाई की मांग
सेथुरमन ने 5 जनवरी 2025 को EPFO को प्रारम्भिक लिखित शिकायत दर्ज करवाई। जब इस पर कोई ठोस समाधान नहीं मिला, तो उन्होंने नई याचिका में कंपनी के प्रबंधन के खिलाफ तत्काल वैधानिक जांच और आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। उन्होंने EPFO को धारा 7A, 13, 7Q, 14B, 8B‑8G आदि प्रावधानों का उपयोग कर कंपनी की वेतन रजिस्टर, हाजिरी रेकॉर्ड और खाता पुस्तकों की जाँच करने, बकाया राशि पर ब्याज व दंड लगाकर कंपनी की संपत्ति जब्त करने की सलाह दी।
सामाजिक सुरक्षा पर प्रभाव
कर्मचारी भविष्य निधि भारत में कामगारों के लिए एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा तंत्र है। कई सालों तक कटे हुए योगदान का न जमा होना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि कामगारों के भविष्य के वित्तीय सुरक्षा को भी खतरे में डालता है। सेथुरमन ने कहा, “कर्मचारी के कड़ी मेहनत की कमाई को रोकना उनके सामाजिक अधिकारों पर सीधा हमला है।”
कामगारों की सामूहिक मांगें
याचिका दायर करने वाले कई कामगारों ने EPFO से तेज़ी से जांच समाप्त करने, बकाया राशि को ब्याज सहित वसूली करने, और प्रभावित कर्मचारियों के खातों में तुरंत जमा करने का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने कंपनी के निदेशकों और प्रबंधकों के खिलाफ धारा 14, 14A, 14(1A) के तहत आपराधिक मुकदमा चलाने की भी माँग की।
यदि EPFO इस मामले में सख़्त कार्रवाई करता है, तो यह न केवल वडिपट्टि के कामगारों को राहत देगा, बल्कि पूरे देश में समान उल्लंघनों को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करेगा।