राजस्थान के उपभोक्ता आयोग ने एक होंडा डीलर को 2018 की कार को 2019 का मॉडल बताकर बेचने के लिए 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बना है।
धोखाधड़ी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का मामला
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक होंडा (Honda) डीलर को 'सेवा में कमी' और 'अनुचित व्यापारिक व्यवहार' का दोषी पाया है। डीलर पर आरोप था कि उसने 2018 मॉडल की एक होंडा अमेज (Honda Amaze) को ग्राहक को 2019 मॉडल के रूप में बेचा, जबकि कार की वारंटी पहले ही तीन महीने कम हो चुकी थी।
क्या था पूरा मामला?
मामला जनवरी 2019 का है, जब शिकायतकर्ता ने एक नई होंडा अमेज बुक की थी। फरवरी 2019 में जब कार की सर्विस के लिए उसे अधिकृत डीलर के पास ले जाया गया, तो इंजन और चेसिस नंबर के माध्यम से यह खुलासा हुआ कि कार पहले ही दिल्ली के एक निवासी के नाम पर पंजीकृत थी और इसकी वारंटी 30 अक्टूबर, 2018 से शुरू हो चुकी थी। इसका सीधा अर्थ यह था कि ग्राहक को एक 'नई' कार के बजाय 'सेकंड हैंड' या पहले से इस्तेमाल की जा चुकी कार बेची गई थी।
डीलर की दलीलें और आयोग का फैसला
डीलर ने अदालत में तर्क दिया कि ग्राहक को छूट (Discount) दी गई थी क्योंकि वारंटी अवधि कम थी, लेकिन वे इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सके। आयोग के अध्यक्ष राजन कुक्कड़ और सदस्यों ने पाया कि डीलर ने कार को नया दिखाने के लिए प्लास्टिक कवरिंग और अन्य कॉस्मेटिक बदलावों का सहारा लिया था, जो कि धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
उपभोक्ता अधिकारों की जीत
आयोग ने डीलर को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए 2 लाख रुपये का मुआवजा और 10,000 रुपये मुकदमेबाजी लागत के रूप में भुगतान करे। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि वाहन डीलर मॉडल वर्ष, वारंटी स्थिति और स्वामित्व के इतिहास के बारे में पूरी तरह से ईमानदार होने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।