मिथी क्रीक की तेज़ बाढ़ ने सूरत के 240 वस्त्र बाजारों को बाढ़ का शिकार बना दिया, जहाँ 75,000 दुकानों को जल स्तर से नुकसान पहुँचा। ट्रेडर्स ने सरकार से तत्काल क्षतिपूर्ति की माँग की है।
सूरत, जो सिंथेटिक साड़ी और सजावटी कपड़ों का प्रमुख उत्पादन केंद्र है, इस सप्ताह भारी वर्षा के कारण अपने कई वस्त्र बाजारों में जलभराव का सामना कर रहा है। फेडरेशन ऑफ़ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन (FOSTTA) के सचिव दिनेश कटारिया के अनुसार, लगभग 60‑250 दुकानों वाले कई भूमिगत बेसमेंट जल में डूब चुके हैं, जिससे व्यापारियों को सैकड़ों करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हो सकता है।
बाढ़ का विस्तार और तत्काल प्रभाव
मंगलवार को गिरने वाली 14 इंच (लगभग 35 सेमी) बारिश ने मिटी क्रीक के जल स्तर को अचानक बढ़ा दिया, जिससे बाजारों के नीचे स्थित गोदाम और शोरूम पूरी तरह डूब गए। रघु कुशल बाजार में सूनिल जैन, जो 2,500 साड़ियों के स्टॉक वाले एक व्यापारी हैं, ने बताया कि अब उन्हें इन वस्त्रों को बहुत कम कीमत पर बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। “हमारे पास घर का ऋण भी है, इसलिए हमें जल निकासी के बाद ही बिक्री करनी होगी,” उन्होंने कहा।
आर्थिक परिप्रेक्ष्य
सूरत में कुल 240 वस्त्र बाजार हैं, जिनमें लगभग 75,000 दुकानें स्थित हैं। स्थानीय ट्रेडर्स के आंकड़ों के अनुसार, शहर वार्षिक 6 लाख करोड़ मीटर कपड़ा उत्पादन करता है और इसका टर्नओवर लगभग ₹1.5 लाख करोड़ है। ऐसी बड़ी आर्थिक धारा के बीच अचानक हुई इस बाढ़ ने न केवल स्थानीय व्यापारियों को बल्कि राष्ट्रीय वस्त्र आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित किया है, क्योंकि कई तैयार मालों को अब समय पर वितरण नहीं किया जा सका।
सरकारी प्रतिक्रिया और मांग
FOSTTA के अध्यक्ष हंसराज जैन ने कहा कि क्षति का सटीक आंकलन तभी संभव होगा जब सभी बाजारों से पानी पूरी तरह निकाल दिया जाएगा। “डेटा मिलने के बाद हम सरकार से पूर्ण क्षतिपूर्ति की माँग करेंगे,” उन्होंने दृढ़ता से कहा। नगर निगम के कमिश्नर एम. नगराजन ने बताया कि पिछले हफ्ते में मौसमी बारिश का 30 % हिस्सा इस सप्ताह आया, और अब तक 20 इंच से अधिक बारिश हुई है।
लॉजिस्टिक्स और भविष्य की चुनौतियाँ
सूरत टेक्सटाइल गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष युवराज देशले ने कहा कि पिछले दो दिनों से पूरे ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में बाधा आई है। सारा 250 ट्रकों में से केवल 5‑8 % ही आजकल माल पहुँचाने में सफल रहे हैं, जबकि 200 से अधिक ट्रक सरोली में फँसे हैं। इस स्थिति ने न केवल व्यापारियों की आय घटाई है, बल्कि राष्ट्रीय वस्त्र निर्यात में भी देरी का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल निकासी और पुनर्स्थापना कार्य शीघ्र नहीं हुआ, तो इस बाढ़ के सामाजिक‑आर्थिक प्रभाव कई महीनों तक महसूस किए जा सकते हैं, जिससे छोटे व्यापारियों के दिवालिया होने की संभावना बढ़ सकती है।