दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक रवि अग्रवाल ने 10 लाख रुपये की छोटी पूंजी से नोकिया फोन की बिक्री शुरू की। अब उनका सेलकोर गैजेट्स 300 करोड़ की फंडिंग लेकर अफ्रीका में पहला उत्पादन प्लांट स्थापित कर रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • रवि अग्रवाल ने 2010 में 10 लाख रुपये के साथ मोबाइल रिटेल शुरू किया।
  • सेलकोर ने 2017 में अपना ब्रांड बनाया और FY26 में 1,292 करोड़ की आय दर्ज की।
  • 300 करोड़ की फंडिंग से लायबेरिया में अंतरराष्ट्रीय मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बनाकर अफ्रीका में विस्तार किया जाएगा।

रवि अग्रवाल, सेलकोर गैजेट्स लिमिटेड के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक, ने 2010 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद 10 लाख रुपये (आंशिक बचत, आंशिक ऋण) की पूंजी से नोकिया और सैमसंग फ़ीचर फ़ोन की बिक्री शुरू की। शुरुआती चरण में वह केवल ट्रेडिंग पर ध्यान केंद्रित करते थे, ब्रांड निर्माण नहीं।

ब्रांड निर्माण की दिशा

2012 में कंपनी को आधिकारिक तौर पर पंजीकृत किया गया, परंतु 2017 तक वह अन्य निर्माताओं के उत्पादों को खरीद‑बिक्री करता रहा। भारत में जीएसटी और बढ़ती नियामक आवश्यकताओं ने उन्हें अपना ब्रांड बनाने की दिशा में प्रेरित किया। उसी वर्ष सेलकोर का जन्म हुआ, जिसकी रणनीति वितरण‑पहले मॉडल पर आधारित थी।

टियर‑III बाजार पर फोकस

स्मार्टफ़ोन की भारी पूँजी आवश्यकताओं से बचते हुए, अग्रवाल ने फीचर फ़ोन से शुरू किया, जिसमें टियर‑II, III और IV ग्राहकों की किफायती मांग को पूरा किया गया। यह वितरण‑केंद्रित दृष्टिकोण कंपनी को भारत भर में एक विशाल ऑफ़लाइन नेटवर्क बनाने में मददगार साबित हुआ।

विविधता और महामारी का प्रभाव

कोरोना महामारी के दौरान संचार एवं मनोरंजन उपकरणों की माँग में तेज़ी आई, जिससे सेलकोर ने मोबाइल एक्सेसरीज़, हियरएबल्स, वेयरएबल्स और ऑडियो प्रोडक्ट्स में विस्तार किया। 2021 में स्मार्ट टीवी में प्रवेश कर, 2023 के आईपीओ के बाद वॉशिंग मशीन, रेफ़्रिजरेटर, एसी, एअर कूलर और छोटे किचन एप्लायंसेज़ को भी पोर्टफ़ोलियो में शामिल किया। आज इन अप्लायंसेज़ की बिक्री कंपनी की आय का प्रमुख हिस्सा बन गई है।

अफ्रीका में नया अध्याय

सेलकोर ने एफसीसीबी के माध्यम से 300 करोड़ रुपये जुटाकर लायबेरिया में एक अंतरराष्ट्रीय उत्पादन इकाई स्थापित करने की योजना बनाई है। इस प्लांट में स्मार्ट टीवी, वॉशिंग मशीन, एसी, एयर कूलर, स्मार्टफ़ोन, फीचर फ़ोन, टैबलेट और छोटे किचन एप्लायंसेज़ का उत्पादन होगा, जिससे यह कंपनी की सबसे बड़ी विदेश में निवेश बन जाएगा। अग्रवाल का मानना है कि अफ्रीका का उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भारत के 10‑15 साल पहले के समान विकास चरण में है, जहाँ तेज़ जनसंख्या वृद्धि, बढ़ती ख़रीद शक्ति और किफायती तकनीकी उत्पादों की मांग है।

आर्थिक लक्ष्य और सामाजिक प्रभाव

सेलकोर ने अगले तीन वर्षों में भारत में 5,000 करोड़ रुपये और अफ्रीका में 1,500‑2,000 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य रखा है। अफ्रीका में पहले वर्ष में लगभग 450 करोड़ रुपये की आय की उम्मीद है, साथ ही 200 से अधिक नौकरियों का सृजन भी होगा। कुल मिलाकर, कंपनी 10,000 करोड़ रुपये के एकीकृत राजस्व लक्ष्य की ओर अग्रसर है, जहाँ अफ्रीका एक मुख्य वृद्धि इंजन के रूप में काम करेगा।