संयुक्त राज्य श्रम विभाग ने H‑1B और PERM रोजगार वीज़ा कार्यक्रमों में संभावित धोखाधड़ी की जांच शुरू की है, जिसमें भारतीय आईटी दिग्गज Cognizant का उल्लेख है। यह कदम अमेरिकी सरकार के रोजगार वीज़ा प्रणाली को साफ‑सुथरा करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • US श्रम विभाग ने H‑1B और PERM वीज़ा धोखाधड़ी की जांच शुरू की।
  • Cognizant का H‑1B आवेदन 2018 से 2025 तक 70% घटा।
  • जाँच में श्रम तस्करी, वेतन कटौती और विदेशी श्रमिकों का शोषण भी शामिल।

Cognizant के नाम को अमेरिकी श्रम विभाग के जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, जहाँ निरीक्षक जनरल एंथनी डी’एस्पोज़िटो ने कहा कि व्हिसलब्लोअर शिकायतों में इस कंपनी को H‑1B और PERM वीज़ा कार्यक्रमों से जोड़ा गया है। यह जांच OIG (Office of Inspector General) द्वारा फेडरल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से चल रही है।

पृष्ठभूमि और डेटा

अमेरिकी श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, Cognizant ने 2018 में 10,189 लेबर कंडीशन एप्लिकेशन (LCA) दायर किए थे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 3,436 रह गई। LCA वह अनिवार्य दस्तावेज़ है जो नियोक्ता को यह प्रमाणित करता है कि वह विदेशी पेशेवर को H‑1B वीज़ा के तहत नियुक्त करने से पहले उचित वेतन और श्रम मानकों का पालन करेगा। इस गिरावट के बावजूद, कंपनी का उल्लेख धोखाधड़ी के संभावित मामलों में आया है।

जांच के प्रमुख बिंदु

OIG ने बताया कि उन्होंने पहले ही कई सब्पोना जारी कर दिए हैं और ऐसे मामलों की जाँच कर रहे हैं जहाँ नियोक्ता और श्रम दलाल ने झूठी वीज़ा आवेदन दायर की, विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर किया और अमेरिकी श्रमिकों को प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया। एजेंसी ने इस बात पर बल दिया कि H‑1B और PERM कार्यक्रम वास्तविक श्रम की कमी को पूरा करने के लिये हैं, न कि धोखाधड़ीपूर्ण हायरिंग के लिए।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि जांच में गंभीर उल्लंघन पाए जाते हैं, तो Cognizant को भारी जुर्माना और भविष्य में वीज़ा आवेदनों पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है। इससे न केवल कंपनी की अंतरराष्ट्रीय भर्ती रणनीति पर असर पड़ेगा, बल्कि भारतीय आईटी निर्यात उद्योग के व्यापक भरोसे पर भी प्रश्न उठेंगे। इस दौरान, कंपनी ने अभी तक किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया को सार्वजनिक नहीं किया है।

विस्तृत विश्लेषण

यह जांच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के तहत रोजगार वीज़ा धोखाधड़ी को समाप्त करने के व्यापक मिशन का हिस्सा है, जहाँ उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की टास्क फोर्स ने कई कंपनियों को लक्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कठोर कार्रवाई से वैध कंपनियों के लिए एक स्पष्ट संदेश जाएगा: नियामक नियमों का उल्लंघन असहनीय है और इसका दंड गंभीर होगा।