गोल्डमैन सैक्स के नवीनतम अनुमान के अनुसार, भारत 2075 में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जबकि अमेरिकी जीडीपी घटकर पीछे रह जाएगी। यह परिवर्तन वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन को पुनः परिभाषित कर सकता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- गोल्डमैन सैक्स के अनुसार 2075 में भारत की GDP 52.5 ट्रिलियन डॉलर, अमेरिका 51.5 ट्रिलियन डॉलर होगी।
- चीन 2075 में पहली पंक्ति में रहेगा, भारत दूसरे स्थान पर, और अमेरिका तीसरे पर।
- ब्रिटेन, जापान, रूस और फ्रांस जैसी पारम्परिक अर्थशक्तियाँ टॉप‑10 से बाहर हो सकती हैं।
नई दिल्ली, 12 जुलाई 2026 – विश्व के प्रमुख वित्तीय संस्थान गोल्डमैन सैक्स ने एक विस्तृत प्रक्षेपण प्रकाशित किया है, जिसमें बताया गया है कि 2075 तक भारत की अर्थव्यवस्था 52.5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुँच कर विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। इस अनुमान के अनुसार, वर्तमान आर्थिक महाशक्ति अमेरिका का आकार 51.5 ट्रिलियन डॉलर रह जाएगा, अर्थात् भारत से लगभग एक ट्रिलियन डॉलर कम।
पृष्ठभूमि और डेटा स्रोत
यह अनुमान World of Statistics के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर साझा किया गया, जहाँ गोल्डमैन सैक्स ने पिछले दो दशकों के जीडीपी वृद्धि दर, जनसंख्या वृद्धि, उत्पादकता सुधार और निवेश प्रवाह को आधार बनाकर भविष्य की आर्थिक रैंकिंग तैयार की। भारत ने पिछले पाँच वर्षों में औसत 7‑8% की निरंतर वृद्धि दर बनाए रखी है, जबकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को श्रम बाजार में अस्थिरता और सार्वजनिक ऋण के बढ़ते बोझ का सामना करना पड़ रहा है।
भौगोलिक और संरचनात्मक बदलाव
भविष्य की इस परिदृश्य में चीन अभी भी शीर्ष पर बना रहेगा, जिसकी 2075 में अनुमानित जीडीपी 57 ट्रिलियन डॉलर है। भारत की तेज़ी का मुख्य कारण युवा जनसंख्या, डिजिटल परिवर्तन, और निर्यात‑उन्मुख उत्पादन क्षमताओं में निवेश है। दूसरी ओर, अमेरिका को तकनीकी नवाचार के बावजूद आयु वर्गीकरण में वृद्धावस्था, उपभोक्ता खर्च में गिरावट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
वैश्विक प्रभाव और नीति‑निर्देश
यदि यह प्रक्षेपण साकार हो जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मुद्रा विनिमय, और बहुपक्षीय संस्थाओं में शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। भारत को अपनी बुनियादी ढांचा, शिक्षा और स्वास्थ्य में निरंतर निवेश जारी रखना होगा, ताकि यह वृद्धि स्थायी बनी रहे। वहीं, अमेरिकी नीति निर्माताओं को श्रम कौशल उन्नयन, सार्वजनिक ऋण प्रबंधन और नवाचार‑आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता होगी।
अन्य प्रमुख अर्थशक्तियों की स्थिति
गोल्डमैन सैक्स ने यह भी संकेत दिया है कि ब्रिटेन, जापान, रूस और फ्रांस जैसी पारम्परिक शीर्ष‑10 अर्थव्यवस्थाएँ 2075 में टॉप‑10 सूची से बाहर हो सकती हैं। इसके बजाय इंडोनेशिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान, इजिप्ट और ब्राज़ील जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएँ क्रमशः चौथे से आठवें स्थान पर आ जाएँगी। यह दर्शाता है कि वैश्विक आर्थिक शक्ति का केंद्र धीरे‑धीरे एशिया‑प्रशांत और अफ्रीकी महाद्वीप की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
समग्र रूप में, यह भविष्यवाणी न केवल भारत की आर्थिक महत्त्वाकांक्षा को रेखांकित करती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के पुनर्गठन के संकेत भी देती है, जहाँ विकसित और उभरती दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नई चुनौतियों और अवसरों का सामना करना पड़ेगा।