राष्ट्रीय कृषि बैंक NABARD ने कड़डालोर जिले के वृध्दाचलाम में एक मोबाइल ‘रूरल मार्ट’ लॉन्च किया, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सीधे बाजार तक पहुंच और बेहतर आय प्राप्त होगी। यह पहल फसल‑गेट खरीद, वैल्यू‑ऐडेड उत्पादों की बिक्री और कृषि इनपुट की डिलीवरी को एक ही वाहन में संयोजित करती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मोबाइल रूरल मार्ट सीधे किसानों को उपभोक्ताओं से जोड़ता है।
  • फ़सल‑गेट खरीद, वैल्यू‑ऐडेड वस्तुओं की बिक्री और इनपुट वितरण एक ही मंच पर।
  • पहले वर्ष में अनुमानित बिक्री ₹1.97 करोड़, शुद्ध आय ₹12.6 लाख।

राष्ट्रीय बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) ने कड़डालोर जिले के वृध्दाचलाम में एक मोबाइल ‘रूरल मार्ट’ का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को बेहतर बाजार पहुंच प्रदान करना है। यह पहल एक किसान प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइज़ेशन (FPO) के साथ मिलकर चलायी जाएगी, जिससे फसल‑गेट पर सीधे खरीद, वैल्यू‑ऐडेड उत्पादों की बिक्री और कृषि इनपुट की डिलीवरी एक ही वाहन में संभव हो सके।

पृष्ठभूमि और उद्देश्य

भारत में छोटे किसान अक्सर मध्यस्थों के कारण उचित मूल्य नहीं प्राप्त कर पाते। NABARD की इस पहल का मूल लक्ष्य इन मध्यस्थी को समाप्त कर, किसानों को उपभोक्ताओं के साथ सीधे जोड़ना है। इस मोबाइल मार्ट में काजू, दालें, मिलेट्स और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ जैसे FPO‑उत्पाद सीधे हाट, मेले और गाँव के बाजार में बेचे जाएंगे, जिससे किसानों की कीमत में सुधार होगा।

कार्यप्रणाली और कवरेज

वैन फसल‑गेट पर उत्पाद खरीदकर उन्हें सफ़ाई, ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग इकाइयों तक ले जाएगा, और फिर तैयार वस्तुओं को स्टोरेज हब और बिक्री बिंदुओं तक पहुंचाएगा। इसके अतिरिक्त, यह मार्ट बीज, उर्वरक, कीटनाशक और कृषि उपकरणों को मांग पर वितरित करेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत और देरी दोनों कम होंगी। इस सेवा का फोकस उन दूरस्थ और पहुंच कठिन गांवों पर है जहाँ सार्वजनिक परिवहन और बाजार बुनियादी ढांचा सीमित है।

आर्थिक प्रभाव

कड़डालोर के कृषि विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, इस मोबाइल मार्ट से पहले वर्ष में अनुमानित बिक्री ₹1.97 क्रोर होगी, जबकि शुद्ध आय लगभग ₹12.6 लाख की उम्मीद है। यह न केवल किसानों की मार्जिन बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्रीय उत्पादों जैसे काजू की दृश्यता भी बढ़ाएगा।

प्रबंधन और निगरानी

मार्ट का स्वामित्व, संचालन और निगरानी FPO के पास रहेगा। दैनिक प्रबंधन, शेड्यूलिंग, खरीद मूल्य निर्धारण और रिकॉर्ड‑कीपिंग के लिए आंतरिक समितियों की स्थापना की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।