पश्चिम बंगाल उपभोक्ता विवाद आयोग ने कोलकाता स्थित एक रियल एस्टेट डेवलपर को ₹20,29,980 के साथ 9% वार्षिक ब्याज और मुकदमे की लागत लौटाने का आदेश दिया। यह फैसला अनपेक्षित निर्माण विलंब के बाद दंपति द्वारा रद्द किए गए फ्लैट बुकिंग के लिए मिला।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बिल्डर ने ₹20.29 लाख प्राप्त किए पर निर्माण कई सालों तक रुका रहा।
  • उपभोक्ता आयोग ने 9% वार्षिक ब्याज और ₹50,000 मुकदमे की लागत के साथ पूरी राशि लौटाने का आदेश दिया।
  • यह निर्णय रियल एस्टेट उपभोक्ता सुरक्षा के कड़े प्रवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

कोलकाता, 14 जुलाई 2026 – पश्चिम बंगाल राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 13 जुलाई को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया, जिसमें कोलकाता स्थित डेवलपर वेदिक कॉन्क्लेव को दंपति सम्बित दास और दिपाली दास को उनके भुगतान की गई राशि ₹20,29,980 के साथ 9% वार्षिक ब्याज और ₹50,000 मुकदमे की लागत लौटाने का निर्देश दिया।

पृष्ठभूमि और अनुबंध विवरण

सम्बित दास ने मार्च 2013 में नई टाउन (पूर्व में राजारहट) क्षेत्र के महिषबथन में स्थित “संजीवा ऑर्चर्ड्स‑II” प्रोजेक्ट के तहत 1,165 वर्ग फुट का फ्लैट और एक कार पार्किंग स्पेस खरीदने के लिए कुल ₹49.60 लाख की 11 किस्तों में भुगतान करने का समझौता किया। शुरुआती दो किस्तों में उन्होंने ₹20,29,980 जमा कराए, जिसके बाद डेवलपर ने भुगतान की मांग बंद कर दी और निर्माण कार्य भी नहीं शुरू हुआ।

विलंब के बाद कानूनी कदम

दंपति ने जुलाई 2016 में बुकिंग रद्द करने और धनवापसी की माँग की, पर कोई जवाब नहीं मिला। दिसंबर 2016 में कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी डेवलपर ने चुप्पी साधी। अंततः उन्होंने उपभोक्ता आयोग में 15% वार्षिक ब्याज, ₹10 लाख मानसिक उत्पीड़न के नुकसान और मुकदमे की लागत की वसूली के साथ पूर्ण रिफंड की मांग की।

आयोग का निर्णय और तर्क

जज बिभास रंजन दे और सदस्य मृदुला रॉय के बेंच ने यह कहा कि दंपति द्वारा भुगतान की गई राशि, बुकिंग रद्द करने की माँग और शेष बकाया न भुगतान करने की स्थिति स्पष्ट है। डेवलपर ने धनवापसी के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, इसलिए आयोग ने 9% वार्षिक ब्याज के साथ पूरी राशि और ₹50,000 मुकदमे की लागत 60 दिनों के भीतर लौटाने का आदेश दिया। दावों में माँगी गई 15% ब्याज और ₹10 लाख नुकसान की राशि को अस्वीकार किया गया।

भविष्य के लिए निहितार्थ

यह फैसला रियल एस्टेट क्षेत्र में उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करता है। कई खरीदारों को अब यह स्पष्ट समझ मिलेगी कि देर से या अधूरी निर्माण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है, और डेवलपर्स को अनुबंधीय दायित्वों का पालन करने के लिए अधिक सतर्क रहना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आदेशों से रियल एस्टेट नियमन में कड़ी निगरानी और पारदर्शी भुगतान प्रणाली को मजबूती मिलेगी।