चार साल की लंबी बातचीत के बाद भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) प्रभावी हो गया है। यह समझौता भारतीय निर्यातकों और ब्रिटिश आयातकों दोनों के लिए नए अवसर लेकर आया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आधिकारिक रूप से लागू हो गया है, जो भारत का किसी विकसित देश के साथ पहला व्यापक समझौता है।
  • ब्रिटिश कारों और स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क में भारी कटौती की जाएगी, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
  • भारतीय कपड़ा, रत्न, आभूषण और जूते उद्योग को यूके के बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी।
  • पेशेवर भारतीय पेशेवरों को यूके में सामाजिक सुरक्षा योगदान (Social Security) से बड़ी राहत मिलेगी।

एक बदलते वैश्विक व्यापार क्रम के बीच, भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) बुधवार से प्रभावी हो गया है। चार वर्षों की जटिल वार्ताओं और लंदन की राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद, यह समझौता भारत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह किसी विकसित राष्ट्र के साथ भारत का पहला व्यापक समझौता है, जो भविष्य में यूरोपीय संघ (EU) के साथ होने वाली वार्ताओं के लिए एक ब्लूप्रिंट का काम करेगा।

उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत: कार और शराब के दाम घटेंगे

इस समझौते का सबसे सीधा प्रभाव भारतीय मध्यम वर्ग और प्रीमियम खरीदारों पर पड़ेगा। भारत ने पहली बार किसी मुक्त व्यापार समझौते में आयातित कारों और शराब पर बड़े रियायतें दी हैं। ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क, जो पहले 110% तक था, पहले वर्ष में घटकर 30% हो जाएगा और पांचवें वर्ष तक यह मात्र 10% रह जाएगा। इसके साथ ही, ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला शुल्क 150% से घटाकर पहले चरण में 75% और दसवें वर्ष तक 40% कर दिया जाएगा।

भारतीय निर्यातकों के लिए 'गोल्डन विंडो'

भारतीय उद्योगों, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए यह समझौता एक वरदान साबित हो सकता है। टेक्सटाइल (कपड़ा) क्षेत्र, जो वर्तमान में यूके में 10% टैरिफ का सामना करता है, अब बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के बराबर खड़ा हो सकेगा। इसके अलावा, रत्न एवं आभूषण और जूता उद्योग के लिए यूके में ड्यूटी को क्रमशः 12% और 16% से हटाकर शून्य कर दिया गया है। स्टील क्षेत्र के लिए भी अच्छी खबर है; यूके द्वारा दिए गए कोटा के कारण भारत का लौह और इस्पात निर्यात 850 मिलियन डॉलर से बढ़कर 1 बिलियन डॉलर के पार जाने की उम्मीद है।

सीमा शुल्क और पेशेवर पेशेवरों को लाभ

व्यापार को सुगम बनाने के लिए, भारत ने यूके के निर्यातकों के लिए 'स्व-घोषणा' (Self-declaration) प्रणाली की अनुमति दी है, जिससे कागजी कार्रवाई और देरी कम होगी। यह कदम चीन और आसियान (ASEAN) देशों पर निर्भरता कम करने की भारत की रणनीति का हिस्सा है। साथ ही, 75,000 भारतीय पेशेवरों को यूके में सामाजिक सुरक्षा योगदान (National Insurance) से पांच साल की छूट मिलेगी, जो लगभग 900 कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा।

चुनौतियां और भविष्य की राह

हालांकि, यह समझौता पूरी तरह दोषरहित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि श्रम और पर्यावरण संबंधी अध्याय बाध्यकारी नहीं हैं, जो भारत के लिए एक बड़ी जीत है क्योंकि पश्चिमी देश अक्सर इनका उपयोग व्यापार बाधा के रूप में करते हैं। हालांकि, भारत को यूके के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) से छूट नहीं मिली है, जो अगले वर्ष से लागू होने वाला है और कार्बन-गहन उद्योगों के लिए चुनौती बन सकता है।