सेबी ने बोर्ड सदस्यों के लिए निवेश को दो भागों में बाँटा – अनुमत और प्रतिबंधित। नई कोड के तहत इक्विटी, डेरिवेटिव्स और परिवर्तन योग्य शेयर को प्रतिबंधित किया गया, जबकि नियामक फंड में निवेश 25% तक सीमित रहेगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बोर्ड सदस्यों के नए शेयर एवं डेरिवेटिव निवेश पर प्रतिबंध
- नियमित फंड (SIP, SIF) में निवेश 25% तक सीमित
- पूरे‑समय सदस्यों को इन्साइडर ट्रेडिंग नियमों के दायरे में लाया गया
सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने 15 जुलाई 2026 को जारी किए गए अपने नवीनतम कोड ऑफ़ कंडक्ट फॉर बोर्ड मेंबर्स 2026 में बोर्ड सदस्यों, जिसमें चेयरपर्सन भी शामिल हैं, के निवेश अधिकारों को दो श्रेणियों में बाँटा है – अनुमत और प्रतिबंधित। यह कदम उच्च स्तर के हित‑संगर्ष समिति (High Level Committee on Conflict of Interest) की सिफ़ारिशों के बाद उठाया गया, जिसने पिछले मामलों में दिखे संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए कठोर दिशा‑निर्देश प्रस्तावित किए थे।
नए नियमों का मुख्य बिंदु
नए कोड के अनुसार, इक्विटी, इक्विटी‑परिवर्तनीय उपकरण और डेरिवेटिव्स को प्रतिबंधित निवेश वर्ग में रखा गया है। इसका अर्थ है कि बोर्ड सदस्य इन साधनों में नया निवेश नहीं कर सकते। इसके विपरीत, नियामक पूल्ड निवेश साधन जैसे कि सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP), स्कीम इंट्रेस्ट फंड (SIF), इनविट (INViT) और रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) को अनुमत माना गया है, बशर्ते कुल निवेश लागत का 25% से अधिक न हो। यह सीमा पिछले वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन या सदस्य के जुड़ने की तिथि, जो भी बाद में हो, उस पर लागू होती है।
पूरा‑समय सदस्यों पर अतिरिक्त प्रतिबंध
पहले 2008 के कोड में केवल शेयर होल्डिंग की घोषणा आवश्यक थी, लेकिन अब पूरे‑समय (Whole Time) सदस्यों को इन्साइडर ट्रेडिंग नियमों के दायरे में लाया गया है और उन्हें ‘कीमत‑संवेदनशील जानकारी वाले व्यक्ति’ माना जाएगा। परिवार की परिभाषा भी विस्तृत की गई है, जिसमें जीवनसाथी, आश्रित बच्चे (जैसे स्टेप‑और दत्तक), कानूनी अभिभावक तथा आर्थिक रूप से निर्भर रक्त‑संबंधी शामिल हैं। यह परिभाषा 2008 के नियम से काफी व्यापक है।
विरोध‑संगर्ष (Conflict of Interest) के कड़े प्रावधान
नए कोड में ‘विरोध‑संगर्ष’ की परिभाषा को भी सख्त किया गया है। बोर्ड सदस्य को किसी भी ऐसे मामले से पूरी तरह हटना होगा जहाँ उनका व्यक्तिगत या पारिवारिक हित टकराव पैदा कर सकता है, केवल खुलासा करने की बजाय। यह प्रतिबंध सेवानिवृत्ति के बाद भी लागू रहेगा; दो साल तक सेबी के सामने या उसके खिलाफ पेश होने से प्रतिबंध, तथा सेवानिवृत्त सदस्य को एक महीने के भीतर किसी भी नौकरी के वार्ता में भाग लेने से रोक।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संभावित प्रभाव
यह कदम पूर्व चेयरपर्सन माधवी पुरी बुख की निवेश‑संबंधी विवादों के बाद आया, जिन्हें बाद में साफ़ किया गया था, परंतु इसने नियामक को अधिक पारदर्शिता की मांग पर मजबूर किया। निवेशकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि बाजार में विश्वास को बढ़ाने के लिए नियामक सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। कंपनियों के बोर्ड में अब अधिक सतर्कता और नियामक अनुपालन की आवश्यकता होगी, जिससे संभावित कॉर्पोरेट गवर्नेंस सुधार की आशा है।