आंध्र प्रदेश में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.9% हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 3.9% से काफी अधिक है। व्यक्तिगत देखभाल और सेवाओं की कीमतों में भारी उछाल ने परिवारों के बजट को बिगाड़ दिया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • आंध्र प्रदेश में खुदरा मुद्रास्फीति मई 2026 में 4.9% दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 3.9% रहा।
  • पिछले पांच महीनों से राज्य की महंगाई दर राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है।
  • व्यक्तिगत देखभाल और विविध सेवाओं में सबसे अधिक वृद्धि (25% से अधिक) देखी गई है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने मध्यम और निम्न आय वर्ग को प्रभावित किया है।
  • राज्य सरकार ने मुद्रास्फीति को 'ध्यान देने योग्य' (Needs Attention) सूची में रखा है।

आंध्र प्रदेश के आम नागरिकों के लिए रसोई का बजट संभालना अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। राज्य में खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) लगातार पांचवें महीने राष्ट्रीय औसत से ऊपर बनी हुई है। नवीनतम आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में राज्य की मुद्रास्फीति दर 4.9% तक पहुंच गई है, जो कि पूरे देश के 3.9% के औसत से काफी अधिक है।

ग्रामीण बनाम शहरी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि महंगाई का असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग तरह से दिख रहा है। ग्रामीण आंध्र प्रदेश में मुद्रास्फीति 5.09% पर है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.61% है। ग्रामीण परिवारों पर इसका बोझ अधिक है क्योंकि वहां खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में 6.91% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। चूंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है, इसलिए कीमतों में मामूली वृद्धि भी उनके मासिक बजट को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।

सेवा क्षेत्र में भारी उछाल

महंगाई केवल अनाज और सब्जियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सेवाओं के क्षेत्र में भी आसमान छू रही है। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा व्यक्तिगत देखभाल और विविध सेवाओं (Personal Care and Miscellaneous Services) का है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में 24.79% और शहरी क्षेत्रों में 25.71% की भारी वृद्धि देखी गई है। इसके अलावा, शिक्षा सेवाओं में 7.36% की वृद्धि हुई है, जिससे स्कूल की फीस और किताबों का खर्च बढ़ गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया और भविष्य की राह

बढ़ती कीमतों के दबाव को देखते हुए, राज्य सरकार ने इस स्थिति को आधिकारिक तौर पर 'Needs Attention' (ध्यान देने योग्य) वॉचलिस्ट में डाल दिया है। वित्त और योजना विभाग के प्रधान सचिव पीयूष कुमार के अनुसार, सरकार इस बात की बारीकी से निगरानी कर रही है कि बढ़ती कीमतें घरेलू खपत और व्यापारिक लागतों को किस हद तक प्रभावित करती हैं। यदि कीमतों में यह वृद्धि जारी रहती है, तो यह राज्य की आर्थिक स्थिरता और 'स्वर्ण आंध्र @2047' के लक्ष्यों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।