जुलाई महीने में भारत ने अक्षय ऊर्जा उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जिससे बिजली मिश्रण में कोयले की हिस्सेदारी पिछले एक साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। सौर और पवन ऊर्जा का योगदान पहली बार 100 गीगावाट के पार पहुंच गया है।

मुख्य बिंदु

  • जुलाई में अक्षय ऊर्जा का उत्पादन 30% बढ़कर 36.25 बिलियन kWh हो गया।
  • सौर और पवन ऊर्जा का संयुक्त आउटपुट पहली बार 100 गीगावाट के पार पहुंचा।
  • कोयले की हिस्सेदारी जून के 69% से घटकर जुलाई में 65.7% रह गई।
  • एल नीनो के कारण जलविद्युत उत्पादन में गिरावट आई है।

भारत के ऊर्जा परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में अक्षय ऊर्जा उत्पादन में जबरदस्त उछाल आया है, जिसके परिणामस्वरूप देश के कुल बिजली मिश्रण में कोयले की हिस्सेदारी पिछले एक साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

डेटा से पता चलता है कि अक्षय ऊर्जा का हिस्सा कुल मिश्रण में 20% तक पहुंच गया है। जुलाई में अक्षय ऊर्जा का उत्पादन 36.25 बिलियन किलोवाट-घंटा (kWh) रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30% अधिक है। विशेष रूप से, 13 जुलाई को सौर और पवन ऊर्जा का आउटपुट पहली बार 100 गीगावाट के आंकड़े को पार कर गया, जो कुल बिजली आपूर्ति का 42.8% था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव भारत के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है। सौर ऊर्जा का बढ़ता योगदान दिन के समय की बिजली मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो ग्रिड स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

सौर और पवन ऊर्जा का 100 गीगावाट के पार जाना भारत के हरित भविष्य की ओर एक मजबूत कदम है।

हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि एल नीनो (El Nino) के प्रभाव के कारण वर्षा कम होने से जलविद्युत (Hydropower) उत्पादन में गिरावट आई है। इसके परिणामस्वरूप, रात के समय अत्यधिक गर्मी के कारण बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए कोयला-आधारित बिजली उत्पादन में वर्ष-दर-वर्ष 12.8% की वृद्धि देखी गई है।

तुलनात्मक विश्लेषण: ऊर्जा मिश्रण (जुलाई)

ऊर्जा स्रोतहिस्सा (%)स्थिति
कोयला65.7%घट रहा है
अक्षय ऊर्जा20.0%बढ़ रहा है
जलविद्युत22.1%गिरावट
क्या आप जानते हैं?: सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन के समय चरम मांग को पूरा करने में सबसे प्रभावी होता है, जिससे ग्रिड पर कोयले का दबाव कम होता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कोयले की हिस्सेदारी क्यों कम हुई?
उत्तर: अक्षय ऊर्जा (विशेषकर सौर और पवन) के रिकॉर्ड उत्पादन के कारण कोयले की हिस्सेदारी कम हुई है।

प्रश्न 2: एल नीनो का बिजली उत्पादन पर क्या असर पड़ा?
उत्तर: एल नीनो के कारण कम बारिश हुई, जिससे जलविद्युत उत्पादन में कमी आई और रात में मांग बढ़ने से कोयले का उपयोग बढ़ा।