वित्त मंत्रालय ने बड़े व्यापारियों के लिए यूपीआई एवं रुपे डेबिट लेन‑देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का प्रस्ताव पारित किया। यह कदम डिजिटल भुगतान बुनियादी ढाँचे की लागत को संतुलित करने के लिए उठाया गया है।
मुख्य बिंदु
- बड़े व्यापारियों (₹50 crore से अधिक) पर यूपीआई और रुपे डेबिट पर MDR लागू
- 1‑3% की दर, पहले से कोई शुल्क नहीं
- सरकारी सब्सिडी योजना छोटे व्यापारियों के लिए जारी
पृष्ठभूमि
जनवरी 2020 से भारत में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड लेन‑देन पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगाया गया था, जिससे डिजिटल भुगतान के अपनाने को बढ़ावा मिला। लेकिन वित्तीय स्थिरता की चिंताओं के कारण, वित्त समिति ने मार्च 2026 में बताया कि “MDR की अनुपस्थिति यूपीआई इकोसिस्टम को अस्थिर बनाती है”。
अब वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन प्रस्तावित किया है, जिससे वार्षिक टर्नओवर ₹50 crore से अधिक वाले बड़े व्यापारी (जैसे Amazon, Flipkart) पर 1‑3% का MDR लगाया जा सकेगा। यह परिवर्तन टैक्सेशन एंड ओथर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के तहत सेक्शन 10A को संशोधित करेगा।
पहले सरकार ने छोटे व्यापारियों को 0.15% तक की सब्सिडी (अधिकतम ₹2,000) के माध्यम से समर्थन दिया था, लेकिन बड़े व्यापारियों को इस योजना में शामिल नहीं किया गया। 2025‑26 में इस सब्सिडी के तहत ₹2,196.21 crore का भुगतान हुआ, जबकि 2024‑25 में ₹1,922.77 crore था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the introduction of MDR on high‑volume merchants could generate an estimated ₹10,000‑₹12,000 crore annual revenue for banks, while potentially increasing transaction costs for e‑commerce platforms and, ultimately, consumers.
“MDR की पुनर्स्थापना डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत को साझा करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है, लेकिन इसे सावधानी से लागू किया जाना चाहिए।” – डॉ. अंजली सिंह, वित्तीय नीति विशेषज्ञ
Frequently Asked Questions
- क्या छोटे व्यापारी अभी भी सब्सिडी योजना के तहत रहेंगे? हाँ, 0.15% तक की सब्सिडी छोटे व मध्यम आकार के व्यापारियों के लिए जारी रहेगी।
- मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की दर कितनी होगी? प्रस्तावित दर 1% से 3% के बीच होगी, जो लेन‑देन के प्रकार और राशि पर निर्भर करेगी।