लंदन स्थित HSBC ने RBI के कंजेशनल स्वैप विंडो के तहत $6.14 बिलियन FCNR(B) जमा एकत्र किए, जिससे SBI के $4.12 बिलियन से आगे निकल गया। निजी बैंकों ने कुल $10.73 बिलियन जमा किए, जबकि ये प्रवाह रुपये पर सीमित असर दिखा रहा है।

मुख्य बातें

  • HSBC ने FCNR(B) जमा में $6.14 बिलियन जुटाए, सबसे आगे।
  • निजी बैंकों ने कुल $10.73 बिलियन जमा किए, सार्वजनिक सेक्टर के बाद।
  • इन प्रवाह ने रुपये की कीमत पर सीमित प्रभाव डाला।

वित्त मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, लंदन‑हेडquartered HSBC ने RBI के कंजेशनल स्वैप सुविधा के तहत अब तक $6.14 बिलियन FCNR(B) जमा जमा कर के सबसे अधिक योगदान दिया है। इसके बाद State Bank of India (SBI) ने $4.12 बिलियन, जबकि ICICI Bank ने $3.7 बिलियन जमा किए हैं।

FCNR(B) जमा पर गैर‑निवासियों को 19 गुना तक लीवरेज मिलने की सुविधा है, जिससे वे $1 मिलियन जमा करके $19 मिलियन तक उधार लेकर वही बैंक में जमा कर सकते हैं। इस कारण NRI निवेशकों को 15% तक का रिटर्न मिल रहा है, जो लीवरेज की लागत और जमा ब्याज दर पर निर्भर करता है।

बैंक रैंकिंग और तुलना

बैंकFCNR(B) जमा (बिलियन $)
HSBC6.14
SBI4.12
ICICI Bank3.70
Kotak Mahindra Bank1.66
Axis Bank1.55
HDFC Bank1.41

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

FCNR(B) कंजेशनल स्वैप विंडो को 5 जून को घोषित किया गया और 8 जून से लागू किया गया। इसका उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित कर INR के मूल्य को स्थिर करना था, क्योंकि 2025 के अंत में US टैरिफ, AI निवेश की कमी और मध्य‑पूर्व में भू‑राजनीतिक तनावों से रुपये का मूल्य गिर रहा था।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that while the surge in FCNR(B) deposits signals strong NRI confidence, the limited impact on the rupee underscores the RBI’s hedging strategies and forward market operations that buffer short‑term volatility.

The rapid rise in leveraged FCNR(B) deposits is a double‑edged sword for India’s foreign‑exchange reserves.
Did You Know?: पहली बार RBI ने बैंक‑वार FCNR(B) जमा डेटा सार्वजनिक किया, जिससे निवेशकों को पारदर्शिता मिली।

Frequently Asked Questions

Q1: FCNR(B) जमा क्या है और इसमें लीवरेज कैसे काम करता है?
A: यह विदेशियों के लिए भारतीय बैंकों में एक फिक्स्ड‑डिपॉज़िट स्कीम है; लीवरेज का मतलब है कि जमा राशि के आधार पर अतिरिक्त धन उधार लेकर फिर उसी बैंक में जमा किया जा सकता है।

Q2: इतने बड़े प्रवाह के बावजूद रुपये की कीमत में सुधार क्यों सीमित है?
A: RBI डॉलर की फॉरवर्ड पोजीशन को कम करने, हेजिंग और स्वैप लागतों के कारण अतिरिक्त विदेशी मुद्रा को तुरंत बाजार में नहीं डालती, जिससे विनिमय दर स्थिर रहती है।