सरकार ने LIC के ऑफर‑फॉर‑सेल (OFS) की न्यूनतम कीमत रुपये 382 निर्धारित की, जिससे शेयरों में लगभग 9% की गिरावट आई। यह कदम सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने और राजस्व बढ़ाने के लिए है।
मुख्य बिंदु
- सरकार ने OFS की न्यूनतम कीमत ₹382 तय की, शेयरों में 8.87% तक गिरावट
- शुरू में 2% हिस्सेदारी बेची जाएगी, कुल 6.5% तक संभव, जिससे ₹31,400 करोड़ जुटाए जा सकते हैं
- यह कदम 2027 तक सार्वजनिक हिस्सेदारी 10% करने और राजकोषीय आय बढ़ाने के लिए है
नई दिल्ली – लाइफ इन्शुरेंस कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (LIC) के शेयर 4 अगस्त को सुबह की ट्रेड में लगभग 9% गिरावट दिखा। यह गिरावट सरकार द्वारा निर्धारित ऑफर‑फॉर‑सेल (OFS) की न्यूनतम कीमत के कारण हुई, जो शेयरों के बंद मूल्य से लगभग 10.9% कम है।
सरकार ने प्रारंभिक रूप से LIC की 2% हिस्सेदारी OFS के माध्यम से बेचने की योजना बनाई है, जिसमें अतिरिक्त 4.5% की बिक्री का विकल्प भी है। यदि पूरा 6.5% हिस्सा बिकता है, तो अनुमानित राजस्व लगभग ₹31,400 करोड़ होगा। यह पहला सार्वजनिक बिक्री है, जो कंपनी ने मई 2022 में स्टॉक मार्केट में प्रवेश करने के बाद से सरकार ने किया है।
इस बिक्री के दो प्रमुख कारण हैं: पहला, सार्वजनिक शेयरधारिता को 2027 तक 10% तक बढ़ाना। वर्तमान में सरकार के पास LIC में लगभग 96.5% शेयर हैं, जबकि सार्वजनिक हिस्सेदारी केवल 3.5% है। दूसरा, केंद्र की विक्रय आय को बढ़ाना, जिसका लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में ₹80,000 करोड़ है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस कदम से न केवल LIC की शेयर कीमत में नई बेंचमार्क स्थापित होगी, बल्कि भारतीय सार्वजनिक वित्त में दीर्घकालिक स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। संस्थागत निवेशकों की मांग और खुदरा निवेशकों की भागीदारी आगे के बाजार दिशा को तय करेगी।
"सरकारी ऑफर की डिस्काउंट कीमत शेयर बाजार में मूल्य-एंकर बन जाती है, जिससे मौजूदा कीमत पर खरीदारी कम आकर्षक हो जाती है," कहा वित्तीय विश्लेषक अंजली शर्मा ने।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या LIC के शेयरों की गिरावट कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन को दर्शाती है?
उत्तर: नहीं, यह मुख्यतः सरकारी डिस्काउंटेड OFS कीमत के कारण है, न कि कंपनी की वित्तीय स्थितियों में गिरावट।
प्रश्न 2: सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने से LIC के भविष्य में क्या लाभ होगा?
उत्तर: सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ने से नियामक अनुपालन आसान होगा और कंपनी को पूंजी बाजार में अधिक लचीलापन मिलेगा।