पेरम्बलूर के पडा़लुर में ₹150 करोड़ की लागत से बन रहा अत्याधुनिक मिल्क पाउडर प्लांट इस वर्ष के अंत तक तैयार हो जाएगा। नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित यह संयंत्र तमिलनाडु का सबसे बड़ा मिल्क पाउडर प्लांट होगा।

मुख्य बातें

  • ₹150 करोड़ की लागत से पडा़लुर में निर्माण कार्य जारी।
  • नाबार्ड (NABARD) द्वारा परियोजना को वित्तपोषित किया गया है।
  • यह तमिलनाडु का सबसे बड़ा होल मिल्क पाउडर प्लांट होगा।
  • प्रतिदिन 60 टन मिल्क पाउडर उत्पादन की क्षमता।

तमिलनाडु के पेरम्बलूर जिले के पडा़लुर में एक अत्याधुनिक होल मिल्क पाउडर निर्माण संयंत्र का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के इस वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। नाबार्ड (NABARD) द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना की कुल लागत लगभग ₹150 करोड़ है।

वर्तमान में, बहुमंजिला ढांचे के नागरिक कार्यों (civil works) का लगभग 75% हिस्सा पूरा हो चुका है। तमिलनाडु सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (Aavin) द्वारा निर्मित इस पांच मंजिला संयंत्र का निर्माण 10,376.60 वर्ग मीटर भूमि पर किया जा रहा है। चौथी मंजिल तक का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संयंत्र न केवल दूध की बर्बादी को कम करेगा बल्कि स्थानीय डेयरी किसानों के लिए आय के नए स्रोत भी खोलेगा। 95% उन्नत मशीनरी, जिसमें स्टोरेज टैंक, पाउडर ड्रायर और पैकिंग मशीनें शामिल हैं, पुणे से प्राप्त की जा चुकी है और इन्हें चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जाएगा।

यह संयंत्र तमिलनाडु के डेयरी उद्योग में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

एक बार चालू होने के बाद, यह संयंत्र प्रतिदिन 60 टन होल मिल्क पाउडर का उत्पादन करेगा। यह तमिलनाडु में सहकारी क्षेत्र के तहत निर्मित अब तक का सबसे बड़ा मिल्क पाउडर संयंत्र होगा। हाल ही में पेरम्बलूर कलेक्टर शारण्या एरी ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया और कार्य की प्रगति का जायजा लिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तमिलनाडु में डेयरी सहकारी आंदोलन दशकों से किसानों की रीढ़ रहा है। दूध की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मिल्क पाउडर का उत्पादन एक रणनीतिक आवश्यकता है, जिससे दूध के अधिशेष (surplus) को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. इस प्लांट की कुल लागत कितनी है?
इस परियोजना की कुल लागत ₹150 करोड़ है, जिसे नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित किया गया है।

2. यह प्लांट प्रतिदिन कितना उत्पादन करेगा?
संचालन शुरू होने के बाद, यह प्लांट प्रतिदिन 60 टन होल मिल्क पाउडर बनाने में सक्षम होगा।

क्या आप जानते हैं?: मिल्क पाउडर बनाने की प्रक्रिया दूध की नमी को कम करके उसे लंबे समय तक खराब होने से बचाती है, जिससे इसे दूरदराज के इलाकों में आसानी से भेजा जा सकता है।