तमिलनाडु सरकार ने जंगली सूअरों और अन्य जानवरों से फसलों को बचाने के लिए ₹7.35 करोड़ के विशेष पैकेज की घोषणा की है। इसमें पर्यावरण के अनुकूल तरल रिपेलेंट और सौर ऊर्जा संचालित बाड़ लगाने की योजना शामिल है।

मुख्य बातें

  • जंगली सूअरों से फसल सुरक्षा के लिए ₹7.35 करोड़ का विशेष बजट आवंटित।
  • TNAU द्वारा विकसित पर्यावरण के अनुकूल तरल रिपेलेंट सब्सिडी पर उपलब्ध होगा।
  • हाथियों और हिरणों से बचाव के लिए सौर ऊर्जा संचालित इलेक्ट्रिक फेंसिंग की सुविधा।
  • आक्रामक प्रजाति 'सीमै करुवेलम' के उन्मूलन के लिए ₹4 करोड़ का प्रावधान।

तमिलनाडु के कृषि मंत्री आर. विनोद ने विधानसभा में कृषि बजट 2026-27 पेश करते हुए किसानों की सुरक्षा के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। जंगली सूअरों द्वारा फसल के नुकसान से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने ₹7.35 करोड़ का विशेष पैकेज आवंटित किया है।

इस बजट का एक प्रमुख हिस्सा तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) द्वारा विकसित एक विशेष पर्यावरण के अनुकूल तरल रिपेलेंट (Liquid Repellent) पर केंद्रित है। सरकार इस तकनीक का उपयोग 14,000 एकड़ भूमि पर करने की योजना बना रही है, जिसके लिए ₹1.35 करोड़ का खर्च आएगा। यह रिपेलेंट किसानों को सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे बिना किसी नुकसान के अपनी फसलों की रक्षा कर सकें।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष वर्तमान में कृषि उत्पादकता के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। केवल जंगली सूअर ही नहीं, बल्कि हाथी, गौर (भारतीय बायसन) और हिरण भी फसलों को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने ₹2 करोड़ का आवंटन सौर ऊर्जा संचालित इलेक्ट्रिक फेंसिंग सिस्टम के लिए किया है, जो किसानों को एक टिकाऊ समाधान प्रदान करेगा।

पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक अपनाना ही भविष्य की कृषि सुरक्षा की कुंजी है।

इसके अतिरिक्त, मंत्री ने बताया कि 'सीमै करुवेलम' (Prosopis juliflora) जैसी आक्रामक वनस्पतियों का अत्यधिक विकास जंगली सूअरों के लिए प्रजनन का स्थान बन गया है। इसे रोकने के लिए जिला कलेक्टरों के माध्यम से सरकारी और निजी भूमि से इन वनस्पतियों को हटाने के लिए ₹4 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।

ऐतिहासिक संदर्भ

बजट के दौरान, मंत्री ने संगम साहित्य के क्लासिक 'मालाइपदुकाडम' का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे प्राचीन काल में समुदाय 'अदर' (Adar) नामक पत्थर के जाल का उपयोग करके जंगली सूअरों को रोकने के लिए रास्तों को सुरक्षित करते थे। यह आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का एक अनूठा संगम है।

क्या आप जानते हैं?: प्राचीन संगम काल में किसान जंगली जानवरों से बचने के लिए पत्थरों के विशेष अवरोधों का उपयोग करते थे, जिसे आज के आधुनिक फेंसिंग का पूर्वज माना जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सरकार जंगली सूअरों से निपटने के लिए क्या तकनीक दे रही है?
सरकार TNAU द्वारा विकसित तरल रिपेलेंट और सौर ऊर्जा संचालित इलेक्ट्रिक फेंसिंग प्रदान कर रही है।

2. इस बजट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य जंगली जानवरों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करना और किसानों की आय सुरक्षित करना है।