ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने कहा है कि भारत को अमेरिकी दबाव में आकर UPI और RuPay की नीतियों में बदलाव नहीं करना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था डिजिटल लेनदेन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

  • GTRI ने UPI पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाने का विरोध किया है।
  • अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारतीय पेमेंट सिस्टम की आलोचना की है।
  • गूगल पे और फोनपे जैसी अमेरिकी कंपनियां पहले से ही 80% बाजार पर कब्जा जमाए हुए हैं।
  • डेटा लोकलाइजेशन भारत की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

नई दिल्ली: आर्थिक थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत को अपनी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर किसी भी बाहरी दबाव, विशेषकर अमेरिका के, में नहीं आना चाहिए। GTRI का तर्क है कि UPI और RuPay जैसे स्वदेशी सिस्टम ने भारत में डिजिटल क्रांति लाने में सफलता पाई है और इनकी मौजूदा नीतियों में बदलाव करना देश के डिजिटल ढांचे के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

अमेरिकी दबाव और USTR की रिपोर्ट

यह विवाद तब गहराया जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की 2026 की नेशनल ट्रेड एस्टीमेट रिपोर्ट में भारत के UPI और ब्राजील के Pix सिस्टम की आलोचना की गई। अमेरिका का दावा है कि ये घरेलू सिस्टम विदेशी कंपनियों को समान अवसर नहीं देते। हालांकि, GTRI ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय बाजार में अमेरिकी कंपनियों का पहले से ही दबदबा है।

Why This Matters: BozokMedia विश्लेषण

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यदि भारत UPI पर शुल्क (MDR) लगाने का निर्णय लेता है, तो इसका सबसे बड़ा असर छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों पर पड़ेगा। वर्तमान में जीरो-MDR व्यवस्था ही वह कारण है जिससे डिजिटल भुगतान हर गांव और गली तक पहुंच पाया है।

भारत को अपनी डिजिटल पेमेंट व्यवस्था की प्रतिस्पर्धा, नीतिगत स्वतंत्रता और दीर्घकालिक स्थिरता की रक्षा करनी चाहिए।

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, शुल्क लगाने का निर्णय केवल सिस्टम की लागत और जरूरतों पर आधारित होना चाहिए, न कि विदेशी शिकायतों पर। थिंक टैंक ने सुझाव दिया है कि सरकार बड़े व्यावसायिक लेनदेन पर सीमित शुल्क लगाकर एक टिकाऊ मॉडल बना सकती है, बजाय इसके कि छोटे व्यापारियों पर बोझ डाला जाए।

अमेरिकी कंपनियों का बाजार पर वर्चस्व

रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि भारतीय डिजिटल भुगतान बाजार में अमेरिकी कंपनियों की हिस्सेदारी बहुत अधिक है। Google Pay और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली PhonePe मिलकर देश के 80 फीसदी से अधिक UPI लेनदेन को प्रोसेस करती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि विदेशी कंपनियों को भारतीय बाजार में पहुंच प्राप्त है।

Did You Know?: UPI (Unified Payments Interface) दुनिया के सबसे सफल रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में से एक है, जिसने नकदी पर निर्भरता को काफी कम कर दिया है।

Frequently Asked Questions

1. MDR क्या है और यह UPI को कैसे प्रभावित करता है?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट, वह शुल्क है जो व्यापारी भुगतान प्राप्त करने के लिए बैंक या नेटवर्क को देते हैं। यदि UPI पर MDR लगता है, तो लेनदेन महंगा हो जाएगा।

2. GTRI ने डेटा लोकलाइजेशन का समर्थन क्यों किया है?
डेटा लोकलाइजेशन से संवेदनशील भुगतान डेटा भारत के भीतर ही रहता है, जिससे साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी की जांच में मदद मिलती है।