भारत की आईटी मंत्रालय ने मेटा को इंस्टाग्राम और फेसबुक के एल्गोरिथ्म की विस्तृत जानकारी देने और बाल यौन शोषण सामग्री एवं ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में सहयोग बढ़ाने का निर्देश दिया।

मुख्य बिंदु

  • भारत सरकार ने इंस्टाग्राम और फेसबुक के एल्गोरिथ्म की पारदर्शिता की माँग की।
  • मेटा की तकनीकी टीम शुक्रवार को एल्गोरिथ्म प्रस्तुति देगी।
  • बाल यौन शोषण सामग्री और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर भारतीय कानूनों के अनुपालन की जाँच होगी।

नई दिल्ली (रिपोर्ट) – भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेटा के नीति अधिकारियों के साथ दो लगातार बैठकों में एल्गोरिथ्म पारदर्शिता और स्थानीय नियमों के अनुपालन पर जोर दिया। यह बैठक मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कैप्लान और सार्वजनिक नीति उपाध्यक्ष नील पॉट्स को भी शामिल करती है।

सरकार ने विशेष रूप से इंस्टाग्राम और फेसबुक के एल्गोरिथ्म को कैसे कंटेंट की पहुँच और दृश्यता निर्धारित करता है, इस पर विस्तृत जानकारी माँगी है। शुक्रवार को मेटा की तकनीकी टीम को अपने एल्गोरिथ्म के काम करने की प्रक्रिया प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

पिछले महीने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद, जहाँ इंस्टाग्राम पर युवा उपयोगकर्ताओं ने व्यापक समर्थन दिखाया, सरकार ने सामाजिक मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों की एल्गोरिथ्म पर अधिक कड़ी निगरानी का इरादा जाहिर किया है। अधिकारियों का मानना है कि ये एल्गोरिथ्म अक्सर विरोधी आवाज़ों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि सरकार‑समर्थित कंटेंट को कम दृश्यता मिलती है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, "हमारे अनुसंधान में पाया गया है कि कई पोस्ट बॉट्स द्वारा आर्टिफिशियल रूप से बढ़ाए जाते हैं, जिससे वे वायरल हो कर उपयोगकर्ताओं के टाइमलाइन पर स्वाभाविक रूप से दिखते हैं। हम यह देखना चाहते हैं कि मेटा प्लेटफ़ॉर्म पर खाते कैसे बनाए जाते हैं, मानव पहचान कैसे सुनिश्चित की जाती है, और किस पैरामीटर के आधार पर कंटेंट को बूस्ट किया जाता है।"

मेटा ने बताया कि उसने भारत‑विशिष्ट मुद्दों को हल करने के लिए एक विशेष आंतरिक समूह स्थापित किया है और सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने की योजना बनाई है। साथ ही, बाल यौन शोषण सामग्री के मामलों में कंपनी के रिपोर्टिंग प्रक्रिया को लेकर भारत की निरंतर शिकायतें भी सामने आई हैं, जहाँ रिपोर्टिंग अक्सर अमेरिकी NCMEC को की जाती है, न कि भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that algorithmic transparency can reshape the power dynamics between global tech giants and sovereign nations, influencing user safety, political discourse, and market strategies in the world's largest democracy.

"यदि मेटा अपने एल्गोरिथ्म को पूरी तरह से खुला नहीं करेगा, तो भारत में डिजिटल सवैरन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों ही जोखिम में पड़ सकते हैं," एक डिजिटल नीति विशेषज्ञ ने कहा।
Did You Know?: भारत में सोशल मीडिया एल्गोरिथ्म की जांच 2020 में शुरू हुई, लेकिन यह 2023 में बड़े छात्र आंदोलन के बाद तीव्र हुई।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या मेटा ने पहले भी भारतीय सरकार को एल्गोरिथ्म जानकारी प्रदान की है?
A1: नहीं, यह पहली बार है जब सरकार ने विस्तृत तकनीकी प्रस्तुति की माँग की है।

Q2: यदि मेटा भारतीय कानूनों का पालन नहीं करता तो क्या परिणाम हो सकते हैं?
A2: संभावित दंड, प्लेटफ़ॉर्म प्रतिबंध, और भारतीय बाजार में व्यापारिक प्रतिबंध लग सकते हैं।