तिरुचि के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और निर्यातकों ने राज्य सरकार से क्षेत्र में एक ड्राई पोर्ट (इनलैंड कंटेनर डिपो) स्थापित करने की तत्काल घोषणा करने का आग्रह किया है। इससे परिवहन लागत कम होगी और व्यापार को नई गति मिलेगी।

मुख्य बातें

  • तिरुचि के MSMEs और निर्यातक राज्य बजट सत्र में ड्राई पोर्ट की घोषणा की मांग कर रहे हैं।
  • वर्तमान में निर्यातकों को चेन्नई और तूतीकोरिन जैसे बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ती है।
  • ड्राई पोर्ट स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर कागजी कार्रवाई और लॉजिस्टिक्स में आसानी होगी।

तिरुचि के व्यापारिक और औद्योगिक हलकों में एक लंबे समय से चली आ रही मांग अब जोर पकड़ रही है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और प्रमुख निर्यातकों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वर्तमान विधानसभा बजट सत्र के दौरान तिरुचि में एक ड्राई पोर्ट (इनलैंड कंटेनर डिपो) स्थापित करने की आधिकारिक घोषणा की जाए।

तिरुचि हाल के वर्षों में राज्य के सबसे तेजी से बढ़ते निर्यात क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा है। यहाँ से इंजीनियरिंग उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, खाद्य उत्पाद, मिलेट्स और फल-सब्जियों जैसे खराब होने वाले सामानों का भारी मात्रा में निर्यात किया जाता है। हालांकि फल और सब्जियों के लिए हवाई कनेक्टिविटी उपलब्ध है, लेकिन अन्य भारी सामानों के लिए निर्यातकों को चेन्नई, तूतीकोरिन, कराईकल या कोच्चि बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि लॉजिस्टिक्स दक्षता किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की रीढ़ होती है। वर्तमान में, तिरुचि से हर महीने लगभग 40 से 50 कंटेनर सड़क मार्ग से अन्य बंदरगाहों तक भेजे जाते हैं। इससे न केवल परिवहन लागत में भारी वृद्धि होती है, बल्कि बंदरगाहों पर होने वाली जटिल कागजी कार्रवाई में भी काफी समय बर्बाद होता है। एक स्थानीय ड्राई पोर्ट इन दोनों समस्याओं का समाधान कर सकता है।

एक स्थानीय ड्राई पोर्ट से न केवल व्यापार की लागत कम होगी, बल्कि तिरुचि की वैश्विक निर्यात क्षमता में भी क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

इस मुद्दे को उठाने के लिए तिरुचि के सांसद दुरई वैको ने सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने इस मामले को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने भी रखा है और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से भी मुलाकात की है। हालांकि, बजट में अभी तक इस संबंध में कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है, जिससे स्थानीय व्यापारियों में निराशा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तिरुचि का औद्योगिक क्लस्टर दशकों से विकास कर रहा है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी हमेशा एक बाधा रही है। एक ड्राई पोर्ट का अभाव निर्यातकों को लंबी दूरी तय करने और उच्च हैंडलिंग शुल्क चुकाने के लिए मजबूर करता है, जो अंततः उनके प्रतिस्पर्धी लाभ को कम करता है।

क्या आप जानते हैं?: ड्राई पोर्ट या इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) समुद्री बंदरगाहों की तरह ही काम करते हैं, जिससे निर्यातकों को अपना सामान वहीं से शिपिंग के लिए तैयार करने की सुविधा मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. ड्राई पोर्ट स्थापित होने से निर्यातकों को क्या लाभ होगा?
इससे परिवहन लागत में कमी आएगी और स्थानीय स्तर पर ही सभी दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी हो सकेंगी।

2. वर्तमान में निर्यातकों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
उन्हें भारी सामान के लिए दूर के बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और पैसा दोनों अधिक खर्च होते हैं।