कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कंपनियों से आग्रह किया है कि वे ग्रामीण स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए अपने CSR फंड का सीधा उपयोग करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोका जा सकता है।
मुख्य बातें
- डीके शिवकुमार ने कंपनियों से CSR फंड को सीधे ग्रामीण स्कूलों के बुनियादी ढांचे में लगाने का आग्रह किया।
- सरकार 2,000 सरकारी स्कूलों के विकास के लिए भूमि और समर्थन प्रदान करेगी।
- ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर शहरों की ओर पलायन को कम करने का लक्ष्य।
- CSR गतिविधियों की निगरानी के लिए एक अलग IAS अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु में आयोजित 'जी बिटसिया (G BITCIA) विजन 2030 - CSR शिखर सम्मेलन 2026' को संबोधित करते हुए निजी क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने उद्योगों से आग्रह किया कि वे अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) को केवल सरकारी मदद के रूप में न देखें, बल्कि इसे समाज और बच्चों के भविष्य में एक निवेश के रूप में उपयोग करें।
शिवकुमार ने सुझाव दिया कि कंपनियों को सरकार को पैसा देने के बजाय सीधे सरकारी स्कूलों को गोद लेना चाहिए। कंपनियां स्वयं ठेकेदारों को नियुक्त कर स्कूल भवन, कंप्यूटर लैब, प्रयोगशालाएं और वाहन जैसी सुविधाएं प्रदान कर सकती हैं। सरकार इसके बदले में आवश्यक भूमि और प्रशासनिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विशेष रूप से इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों के कार्यों की सराहना की।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने से न केवल सामाजिक समानता आएगी, बल्कि रोजगार के लिए शहरों की ओर होने वाले अनियंत्रित पलायन में भी कमी आएगी। यदि ग्रामीण छात्र तकनीक और आधुनिक संसाधनों से लैस होंगे, तो वे स्थानीय स्तर पर ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकेंगे।
"CSR को केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि समाज के भविष्य में किया गया निवेश माना जाना चाहिए।"
उपमुख्यमंत्री ने निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए आरक्षित 25% सीटों के कार्यान्वयन में अनियमितताओं पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बिचौलियों और अवैध प्रवेश शुल्क जैसी प्रथाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने शहरी छात्रों को कृषि और ग्रामीण जीवन से जोड़ने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव का भी प्रस्ताव रखा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) का ढांचा काफी मजबूत हुआ है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कर्नाटक में, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में CSR निवेश की अपार संभावनाएं हैं, हालांकि वर्तमान में निवेश की दर क्षमता से काफी कम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कंपनियां सरकारी स्कूलों को कैसे गोद ले सकती हैं?
उत्तर: कंपनियां सीधे ठेकेदारों के माध्यम से स्कूल का निर्माण कर सकती हैं या कंप्यूटर और लैब जैसी सुविधाएं दान कर सकती हैं, जबकि सरकार भूमि उपलब्ध कराएगी।
प्रश्न 2: CSR फंड की निगरानी कौन करेगा?
उत्तर: सरकार CSR गतिविधियों और फंड के उपयोग की ट्रैकिंग के लिए एक अलग IAS अधिकारी नियुक्त करेगी।