भारतपे के पूर्व सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह कदम भारत की डिजिटल क्रांति को नुकसान पहुंचा सकता है।

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मुख्य बातें

  • सरकार UPI लेनदेन पर MDR शुल्क लगाने के लिए कानूनी ढांचा तैयार कर रही है।
  • अशनीर ग्रोवर ने इसे 'पिछड़ा कदम' बताते हुए मोबाइल पेमेंट के खत्म होने की चेतावनी दी है।
  • वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि शुल्क व्यापारियों पर होगा, ग्राहकों पर नहीं।

हाल ही में संसद में पारित टैक्सेशन और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 ने डिजिटल भुगतान की दुनिया में हलचल मचा दी है। यह विधेयक सरकार को भविष्य में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का कानूनी अधिकार देता है। इस संभावित बदलाव पर भारत के मशहूर उद्यमी अशनीर ग्रोवर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

अशनीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि UPI पर कोई भी MDR शुल्क लगाना एक 'पिछड़ा कदम' होगा। उन्होंने तर्क दिया कि UPI भारत की सबसे सुचारू रूप से चलने वाली डिजिटल व्यवस्था है और शुल्क लगाने से यह पूरी व्यवस्था चरमरा सकती है। ग्रोवर के अनुसार, इससे मोबाइल पेमेंट का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ UPI है। यदि व्यापारियों पर शुल्क का बोझ बढ़ता है, तो वे या तो डिजिटल भुगतान को हतोत्साहित करेंगे या इसका बोझ अंततः ग्राहकों पर डालने की कोशिश करेंगे। एक सर्वे के अनुसार, MDR लागू होने से भारत में 50% से अधिक UPI लेनदेन कम हो सकते हैं।

UPI पर कोई भी MDR भारत की एकमात्र चीज को खत्म कर देगा, जो घड़ी की तरह सुचारू रूप से चल रही है।

दूसरी ओर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि भविष्य में कोई शुल्क लागू किया जाता है, तो उसका भार केवल व्यापारियों (Merchants) पर होगा। ग्राहकों के लिए यह सेवा मुफ्त बनी रहेगी। सरकार का तर्क है कि इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को सुरक्षा और नवाचार में निवेश करने के लिए संसाधन मिलेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जब UPI लॉन्च किया गया था, तब से ही इसे 'जीरो MDR' नीति के तहत बढ़ावा दिया गया है ताकि छोटे से छोटा व्यापारी भी बिना किसी अतिरिक्त लागत के डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सके। यह नीति भारत के वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) की सफलता का मुख्य आधार रही है।

क्या आप जानते हैं?: UPI भारत की एक ऐसी डिजिटल क्रांति है जिसने नकद लेनदेन पर निर्भरता को ऐतिहासिक रूप से कम कर दिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या मुझे UPI पेमेंट करने के लिए पैसे देने होंगे?
नहीं, वित्त मंत्री के अनुसार, MDR शुल्क केवल व्यापारियों पर लागू होगा, आम ग्राहकों पर नहीं।

2. क्या अभी से शुल्क लगना शुरू हो गया है?
नहीं, वर्तमान में कोई शुल्क नहीं है। विधेयक केवल भविष्य में शुल्क लगाने का कानूनी रास्ता साफ करता है।