चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) फेज II के भूमिगत निर्माण कार्यों में हो रही देरी को दूर करने के लिए ₹180 करोड़ की लागत से तीन नई टनल बोरिंग मशीनें (TBM) खरीदने जा रहा है। ये मशीनें मुख्य रूप से कॉरिडोर 3 के महत्वपूर्ण हिस्सों में तैनात की जाएंगी।

मुख्य बिंदु

  • CMRL ₹180 करोड़ की लागत से तीन नई टनल बोरिंग मशीनें (TBM) खरीदेगा।
  • नई मशीनें तिरुवनमियुर-तारामणि, हजार लाइट-अन्ना फ्लाईओवर और मंडईवेली-थिरुमयिलाई खंडों में तैनात की जाएंगी।
  • फेज II के कॉरिडोर 3 में अभी 23.36 किमी टनलिंग का काम लंबित है।
  • काम में देरी के मुख्य कारण स्टेशन शाफ्ट निर्माण में देरी और उपयोगिताओं (utilities) का स्थानांतरण रहे हैं।

चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) ने अपने महत्वाकांक्षी फेज II विस्तार परियोजना के भूमिगत निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। परियोजना के विभिन्न हिस्सों में टनलिंग कार्यों में हो रही देरी को देखते हुए, प्रशासन ने जल्द ही तीन अतिरिक्त टनल बोरिंग मशीनें (TBM) खरीदने का निर्णय लिया है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन नई मशीनों की अनुमानित लागत लगभग ₹180 करोड़ होगी। इन टनलिंग मशीनों को विशेष रूप से तीन महत्वपूर्ण मार्गों पर तैनात किया जाएगा: तिरुवनमियुर से तारामणि, हजार लाइट से अन्ना फ्लाईओवर, और मंडईवेली से थिरुमयिलाई। ये क्षेत्र कॉरिडोर 3 का हिस्सा हैं, जो चेन्नई के शहरी यातायात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विकास?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चेन्नई का फेज II नेटवर्क शहर की भविष्य की परिवहन जरूरतों के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होगा। कॉरिडोर 3, जो मदवारम से SIPCOT तक जाता है, फेज II परियोजना का सबसे लंबा भूमिगत नेटवर्क (26.7 किमी) है। वर्तमान में, इस कॉरिडोर के कुल 43.04 किमी टनलिंग कार्य में से केवल 19.68 किमी ही पूरा हो पाया है, जिसका अर्थ है कि अभी भी एक बड़ा हिस्सा काम बाकी है।

नई मशीनों की तैनाती से न केवल निर्माण की गति बढ़ेगी, बल्कि यह परियोजना की समयसीमा को भी पटरी पर लाने में मदद करेगी।

निर्माण में देरी के कारणों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि भूमिगत स्टेशनों के लिए निविदाओं (tenders) का रद्द होना, स्टेशन शाफ्ट के निर्माण में विलंब और विभिन्न उपयोगिताओं (जैसे पानी और बिजली की लाइनें) को स्थानांतरित करने में लगने वाला समय प्रमुख बाधाएं रही हैं। हालांकि, अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अब काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

चेन्नई मेट्रो का विस्तार शहर की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान करने के लिए किया जा रहा है। फेज II परियोजना का लक्ष्य शहर के कोने-कोने को जोड़ना है, जिससे यात्रा के समय में भारी कमी आएगी।

क्या आप जानते हैं?: चेन्नई मेट्रो का फेज II प्रोजेक्ट शहर के सबसे बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है, जिसमें 118.9 किमी का विशाल नेटवर्क शामिल है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. नई TBM मशीनें कहाँ तैनात की जाएंगी?
ये मशीनें तिरुवनमियुर-तारामणि, हजार लाइट-अन्ना फ्लाईओवर और मंडईवेली-थिरुमयिलाई खंडों में तैनात की जाएंगी।

2. टनलिंग में देरी क्यों हुई?
स्टेशन शाफ्ट के निर्माण में देरी और उपयोगिताओं के स्थानांतरण जैसे कारणों से देरी हुई है।