प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और सतीश सेठ के खिलाफ 187 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन शिकायत दर्ज की है। यह मामला NHAI टोल-रोड परियोजनाओं के फंड को शेल कंपनियों के जरिए डायवर्ट करने से जुड़ा है।

मुख्य बातें

  • ED ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और सतीश सेठ के खिलाफ PMLA के तहत मामला दर्ज किया।
  • 187 करोड़ रुपये के फंड को चार NHAI टोल-रोड परियोजनाओं से डायवर्ट करने का आरोप।
  • फंड को शेल कंपनियों और हीरा व्यापारियों के माध्यम से घुमाया गया।
  • ED ने 187 करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही कुर्क कर ली है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (RIL), सतीश सेठ और अन्य आरोपियों के खिलाफ 187 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक गंभीर प्रवर्तन शिकायत (Prosecution Complaint) दर्ज की है। यह शिकायत दिल्ली की द्वारका जिला अदालत के विशेष PMLA न्यायालय में पेश की गई है।

जांच के अनुसार, यह पूरा मामला भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को आवंटित चार प्रमुख टोल-रोड परियोजनाओं से संबंधित है। आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके इन परियोजनाओं के लिए आवंटित सार्वजनिक धन को शेल संस्थाओं (Shell Entities) के माध्यम से डायवर्ट किया।

फंड डायवर्जन का जटिल तरीका

ED की जांच से पता चला है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी। आरोपियों ने काल्पनिक उप-अनुबंध (Sub-contracting) कार्यों के लिए फर्जी और बैक-डेटेड व्यवस्थाएं कीं। पैसा RIL या उसके विशेष प्रयोजन वाहनों (SPVs) से निर्माण ठेकेदारों के पास गया और फिर उन शेल कंपनियों तक पहुँचा जिनका सड़क निर्माण से कोई लेना-देना नहीं था। अंततः, इन पैसों को हीरा व्यापारियों के माध्यम से लेयर किया गया ताकि इनके स्रोत को छुपाया जा सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जब सरकारी अनुदान और बैंक ऋणों का उपयोग निजी लाभ के लिए किया जाता है, तो यह न केवल अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है बल्कि निवेशकों के भरोसे को भी तोड़ता है।

कॉर्पोरेट जगत में शेल कंपनियों के माध्यम से धन का हेरफेर करना नियामक संस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, ED ने पहले ही 187 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इसमें रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और विभिन्न अचल संपत्तियां शामिल हैं। आरोपी सतीश सेठ वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह मामला मुंबई आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा 11 फरवरी, 2026 को दर्ज की गई प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें फर्जी इनवॉइस और अत्यधिक मूल्य वाले हीरा आयात के माध्यम से धन भेजने के आरोप लगाए गए थे।

क्या आप जानते हैं?: मनी लॉन्ड्रिंग में 'लेयरिंग' वह प्रक्रिया है जिसमें अवैध धन के स्रोत को छिपाने के लिए उसे कई जटिल लेनदेन के माध्यम से घुमाया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर मुख्य आरोप क्या हैं?
आरोप है कि कंपनी ने NHAI की चार सड़क परियोजनाओं के लिए मिले फंड को फर्जी ठेकेदारों और शेल कंपनियों के माध्यम से डायवर्ट किया।

2. ED ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
ED ने 187 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है और अदालत में प्रवर्तन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है।