नए बैरियर-लेस टोल सिस्टम (MLFF) के आंकड़ों से पता चला है कि हर 10 में से एक वाहन बिना वैध FASTag के टोल पार कर रहा है। दिल्ली का मुंडका टोल प्लाजा उल्लंघन के मामले में सबसे ऊपर है।

मुख्य बातें

  • हर 10 में से लगभग 1 वाहन बिना वैध FASTag के बैरियर-लेस टोल पार कर रहा है।
  • दिल्ली का मुंडका टोल प्लाजा सर्वाधिक 4.54 लाख ई-नोटिस के साथ सबसे आगे है।
  • कारें सबसे बड़ी अपराधी हैं, जो कुल ई-नोटिस का 91% हिस्सा बनाती हैं।
  • सरकार 2029 तक सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर MLFF लागू करने का लक्ष्य रख रही है।

भारत के राजमार्गों पर तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हालिया विश्लेषण के अनुसार, पांच मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोल प्लाजा पर चलने वाले 10 में से लगभग एक वाहन बिना वैध या पर्याप्त बैलेंस वाले FASTag के टोल पार कर रहा है। मई से जुलाई के बीच कुल 10.52 लाख ई-नोटिस जारी किए गए, जो दर्शाता है कि टोल भुगतान में अनुपालन की बड़ी कमी है।

मुंडका और चौरसिया: आंकड़ों का खेल

डेटा के अनुसार, दिल्ली का मुंडका टोल प्लाजा सबसे अधिक 4.54 लाख ई-नोटिस दर्ज करने वाला केंद्र बनकर उभरा है। हालांकि, यदि उल्लंघन की दर (Violation Rate) की बात करें, तो गुजरात का चौरसिया टोल 11.97% के साथ शीर्ष पर है। मुंडका में वसूली दर (Realisation) सबसे कम यानी केवल 20% रही है, जबकि चौरसिया में यह 60% से अधिक है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बैरियर-लेस टोलिंग (MLFF) का उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना और ईंधन बचाना है, लेकिन यदि अनुपालन दर कम रहती है, तो इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो सकता है। बिना रुकावट के चलने वाले इन प्लाजा पर ई-नोटिस के माध्यम से वसूली करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

तकनीकी रूप से उन्नत टोल सिस्टम तभी सफल हैं जब उनके साथ सख्त दंड और त्वरित वसूली तंत्र भी काम करे।

वाहनों के प्रकार की बात करें तो कारें और जीप सबसे बड़े उल्लंघनकर्ता हैं। कुल ई-नोटिस में इनका हिस्सा 91% से अधिक है। इसके बाद भारी वाहनों (बस और ट्रक) का स्थान आता है, जो कुल मामलों का लगभग 3.5% हिस्सा बनाते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने राजमार्गों पर भीड़भाड़ कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए पारंपरिक बैरियर वाले टोल से 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) की ओर कदम बढ़ाया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, मार्च 2029 तक सभी चार-लेन और उससे अधिक वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर यह प्रणाली पूरी तरह लागू होने की उम्मीद है।

क्या आप जानते हैं?: यदि आप ई-नोटिस मिलने के 72 घंटों के भीतर टोल का भुगतान नहीं करते हैं, तो आपको दोगुना टोल शुल्क देना पड़ सकता है।

Frequently Asked Questions

1. MLFF टोल सिस्टम क्या है?
यह एक बैरियर-लेस सिस्टम है जहाँ वाहनों को रुकने की आवश्यकता नहीं होती; कैमरे और सेंसर स्वचालित रूप से FASTag की जांच करते हैं।

2. ई-नोटिस का भुगतान न करने पर क्या होगा?
72 घंटों के भीतर भुगतान न करने पर वाहन मालिक को निर्धारित टोल राशि का दोगुना भुगतान करना होगा।