खदान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के पारित होने से केंद्र और राज्यों के बीच करों को लेकर संघर्ष फिर से शुरू हो गया है। यह बिल राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त करों को सीमित करने का प्रयास करता है।

मुख्य बातें

  • नया बिल राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर विशिष्ट लेवी लगाने से रोकने का प्रयास करता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले ने राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति दी थी।
  • झारखंड, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्य इस कदम का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
  • केंद्र का तर्क है कि अत्यधिक करों से खनिजों की लागत और मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।

संसद के दोनों सदनों में खदान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के पारित होने के साथ ही, खनिज संसाधनों के कराधान और उनसे उत्पन्न राजस्व को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच चल रहा पुराना विवाद फिर से गरमा गया है। यह संशोधन राज्यों की उस शक्ति को सीमित करने का लक्ष्य रखता है जिसके तहत वे खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर अतिरिक्त लेवी (levies) लगा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और राज्यों की नई शक्ति

इस विवाद की जड़ 2024 में सुप्रीम कोर्ट का एक ऐतिहासिक फैसला है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर कर लगाने का अधिकार है। इस फैसले के बाद, झारखंड, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे खनिज संपन्न राज्यों ने अपनी आय बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के करों और लेवी को लागू करना शुरू कर दिया था।

केंद्र बनाम राज्य: टकराव के मुख्य बिंदु

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस संशोधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है, उनका कहना है कि इससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान होगा। वहीं, केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने इसे भारत के संघीय ढांचे के लिए खतरा बताया है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह लड़ाई केवल करों की नहीं, बल्कि वित्तीय स्वायत्तता की है। जहाँ केंद्र का कहना है कि अनियंत्रित राज्य-स्तरीय करों से बुनियादी ढांचे की लागत और महंगाई बढ़ सकती है, वहीं राज्य इसे अपनी आर्थिक शक्ति छीनने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं।

खनिज क्षेत्र में संशोधनों से कंपनियों को वित्तीय स्थिरता तो मिलेगी, लेकिन राज्यों के राजस्व मॉडल पर गहरा संकट मंडरा सकता है।
क्या आप जानते हैं?: ओडिशा जैसे खनिज संपन्न राज्यों के लिए उनके कुल राजस्व का लगभग 23% हिस्सा केवल खनिज और पेट्रोलियम से आता है।

राज्यों पर राजस्व का प्रभाव

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राज्यखनिज राजस्व का महत्व (अनुमानित)स्थिति
ओडिशाउच्च (23%)राजस्व पर अत्यधिक निर्भर
झारखंडमध्यम (13%)विरोध में सक्रिय
छत्तीसगढ़मध्यम (5%)राजस्व पर निर्भर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. नया बिल राज्यों की क्या शक्ति कम करता है?
यह बिल राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर अतिरिक्त कर (levies) लगाने से रोकने का प्रयास करता है।

2. केंद्र का इस बिल के पीछे क्या तर्क है?
केंद्र का मानना है कि अत्यधिक करों से खनिजों की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे मुद्रास्फीति और निर्माण लागत में वृद्धि होगी।