केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने छोटे करदाताओं के लिए 'FAST-DS 2026' योजना शुरू की है, जिससे वे अपनी बिना घोषित विदेशी संपत्तियों और आय का खुलासा कर कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं।
- विदेशी संपत्तियों के प्रकटीकरण के लिए 16 अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक का समय।
- बिना टैक्स वाली आय (1 करोड़ तक) पर 60% प्रभावी भुगतान करना होगा।
- टैक्स चुकाई गई लेकिन बिना घोषित संपत्ति (5 करोड़ तक) के लिए केवल 1 लाख रुपये की फीस।
- सफल प्रकटीकरण के बाद 'ब्लैक मनी एक्ट 2015' के तहत अभियोजन से मुक्ति।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने हाल ही में 'विदेशी संपत्ति छोटे करदाता प्रकटीकरण योजना' (FAST-DS), 2026 को अधिसूचित किया है। यह योजना उन करदाताओं के लिए एक जीवनदान की तरह है जिन्होंने अनजाने में या किसी अन्य कारण से अपनी विदेशी बैंक खातों, अचल संपत्ति, निवेश या आय को अपने आयकर रिटर्न (ITR) में नहीं दिखाया था।
यह योजना 16 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुकी है और इसके तहत घोषणाएं करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है। पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जिससे करदाताओं को सुविधा होगी।
कौन इस योजना का लाभ उठा सकता है?
FAST-DS का लाभ निवासी (Residents), अनिवासी (Non-residents) और निवासी लेकिन सामान्यतः निवासी नहीं (RNOR) करदाता उठा सकते हैं। मुख्य शर्त यह है कि करदाता उस वर्ष भारत का निवासी रहा हो जब वह आय अर्जित की गई थी या जब विदेशी संपत्ति खरीदी गई थी। यह उन मामलों में लागू होता है जहाँ रिटर्न दाखिल नहीं किया गया, या रिटर्न में संपत्ति का विवरण छोड़ दिया गया।
भुगतान संरचना: दो मुख्य श्रेणियां
CBDT ने करदाताओं को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है, जिससे यह तय होता है कि उन्हें कितना भुगतान करना होगा:
| विवरण | श्रेणी 1: बिना टैक्स वाली आय/संपत्ति | श्रेणी 2: टैक्स चुकाई गई पर बिना घोषित संपत्ति |
|---|---|---|
| अधिकतम सीमा | 1 करोड़ रुपये तक | 5 करोड़ रुपये तक |
| भुगतान दर | 30% टैक्स + 100% टैक्स (कुल 60%) | फ्लैट 1 लाख रुपये की फीस |
| लागू नियम | आय पर टैक्स नहीं दिया गया था | आय पर टैक्स दिया, पर संपत्ति नहीं बताई |
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम भारत सरकार द्वारा वैश्विक स्तर पर कर चोरी को रोकने और पारदर्शी वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास है। यह छोटे करदाताओं को भारी जुर्माने और जेल की सजा से बचाने का एक अवसर देता है, जबकि सरकार के राजस्व में वृद्धि करता है।
"FAST-DS योजना का मुख्य उद्देश्य करदाताओं को ब्लैक मनी एक्ट की कठोरता से बचाकर उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में वापस लाना है।"
प्रकटीकरण की प्रक्रिया और मूल्यांकन
संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए 31 मार्च 2026 की तारीख तय की गई है। करदाताओं को फॉर्म 1 के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से घोषणा करनी होगी। बैंक खातों, शेयरों, गहनों और अचल संपत्ति के मूल्यांकन के लिए अलग-अलग तरीके निर्धारित किए गए हैं, और अंतिम मूल्य भारतीय रुपयों में रिपोर्ट करना होगा।
सत्यापन के बाद, कर अधिकारियों द्वारा फॉर्म 2 के माध्यम से देय राशि की सूचना दी जाएगी। भुगतान के लिए आमतौर पर दो महीने का समय मिलता है, जिसके बाद विलंब शुल्क के रूप में 1% मासिक ब्याज लगाया जा सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और कानूनी सुरक्षा
भारत ने 2015 में 'ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर कानून' लागू किया था, जो विदेशी संपत्तियों को छिपाने पर बहुत कठोर दंड का प्रावधान करता है। FAST-DS इसी कानून के दबाव को कम करने और करदाताओं को एक 'एग्जिट रूट' देने के लिए लाया गया है। हालांकि, यह योजना मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चल रहे मामलों या पहले से पूरे हो चुके ब्लैक मनी एक्ट के असेसमेंट पर लागू नहीं होगी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या मैं अपनी 6 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्ति का खुलासा इस योजना के तहत कर सकता हूँ?
उत्तर: यदि आपने आय पर टैक्स चुकाया है, तो सीमा 5 करोड़ रुपये है; यदि नहीं चुकाया है, तो सीमा 1 करोड़ रुपये है। 6 करोड़ की संपत्ति इस योजना के दायरे से बाहर होगी।
प्रश्न 2: क्या प्रकटीकरण के बाद मुझे जेल जाने का डर रहेगा?
उत्तर: नहीं, एक बार वैध घोषणा और भुगतान पूरा हो जाने के बाद, आपको ब्लैक मनी एक्ट 2015 के तहत अभियोजन और दंड से पूर्ण उन्मुक्ति (Immunity) मिल जाएगी।