भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के तहत 31 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिससे ₹7,877 करोड़ का निवेश आएगा। इस कदम का उद्देश्य भारत को केवल असेंबली हब से बदलकर एक पूर्ण विनिर्माण केंद्र बनाना है।
- 31 नए आवेदनों को मंजूरी, ₹7,877 करोड़ का प्रस्तावित निवेश।
- कुल 106 प्रोजेक्ट्स स्वीकृत, निवेश लक्ष्य ₹59,350 करोड़ से बढ़कर ₹69,548 करोड़ हुआ।
- 10,000 प्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन और ₹82,243 करोड़ के उत्पादन की उम्मीद।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के तहत 31 और आवेदनों को मंजूरी दे दी है। इस नवीनतम चरण में ₹7,877 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव है, जो भारत सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत देश को केवल तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के बजाय उनके घटकों और सब-असेंबली के उत्पादन में गहराई तक ले जाया जा रहा है।
आईटी सचिव एस कृष्णन ने सोमवार को बताया कि ये परियोजनाएं 10 राज्यों में फैली हुई हैं। इनसे न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि लगभग 10,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। स्वीकृत उत्पादों की सूची काफी विस्तृत है, जिसमें कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल, एनोड सामग्री, दुर्लभ-पृथ्वी स्थायी चुंबक, ऑप्टिकल ट्रांसीवर, स्पीकर, माइक्रोफोन, एंटीना और कैपेसिटर जैसे महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत अब तक 'असेंबली-केंद्रित' मॉडल पर निर्भर रहा है, जहां पुर्जे आयात किए जाते थे और केवल अंतिम उत्पाद तैयार किया जाता था। ECMS के माध्यम से, सरकार इस निर्भरता को खत्म कर रही है। जब उच्च-मूल्य वाले घटकों का निर्माण घरेलू स्तर पर होगा, तो भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में स्थिति और अधिक मजबूत होगी।
"घटकों के स्तर पर आत्मनिर्भरता ही भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मानचित्र पर एक वास्तविक महाशक्ति बनाएगी, न कि केवल एक असेंबली लाइन।"
योजना की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक कुल 106 आवेदनों को मंजूरी मिल चुकी है, जो 15 राज्यों में फैले हैं। कुल प्रस्तावित निवेश ₹69,548 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसने मूल लक्ष्य ₹59,350 करोड़ को पार कर लिया है। उत्पादन का अनुमानित मूल्य भी ₹5.34 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो मूल लक्ष्य ₹4.56 लाख करोड़ से काफी अधिक है।
कई परियोजनाएं पहले ही धरातल पर उतर चुकी हैं। ATL की लिथियम-आयन सेल सुविधाएं और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का एनक्लोजर प्लांट पहले से ही चालू हैं। वहीं, केन्स सर्किट, मोथर्सन और विप्रो ग्लोबल जैसे दिग्गजों के प्लांट जल्द ही चालू होने वाले हैं।
| विवरण | मूल लक्ष्य (Original Target) | वर्तमान स्थिति (Current Status) |
|---|---|---|
| कुल निवेश | ₹59,350 करोड़ | ₹69,548 करोड़ |
| अनुमानित उत्पादन | ₹4.56 लाख करोड़ | ₹5.34 लाख करोड़ |
| रोजगार सृजन | 91,600 नौकरियां | ~75,000 (प्रतिबद्ध) |
बजट 2026-27 में, सरकार ने इस योजना के लिए परिव्यय को ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया है, जो उद्योग की भारी मांग और उत्साह को दर्शाता है। 2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ हो गया है, जबकि निर्यात ₹4.24 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
Frequently Asked Questions
1. ECMS योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सब-असेंबली के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
2. इस योजना से रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
अब तक स्वीकृत परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 75,000 नौकरियों का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें नवीनतम मंजूरी से 10,000 और प्रत्यक्ष नौकरियां जुड़ेंगी।