वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ दो दिवसीय बैठक की, जिसमें युवाओं (Gen Z) की बैंकिंग जरूरतों और जमा राशि बढ़ाने की रणनीतियों पर गहन चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बैंकिंग सुधार लाना है।
- जेन जेड (15-29 वर्ष) के लिए विशेष बैंकिंग उत्पादों का विकास।
- विकसित भारत के लिए उच्च-स्तरीय बैंकिंग समिति का जल्द गठन।
- घरेलू ऋण में वृद्धि और असुरक्षित ऋणों पर चिंता।
- जमा संग्रहण (Deposit Mobilisation) को बढ़ाने के लिए नए स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स पर विचार।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार से शुरू हुई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और वित्त मंत्रालय की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में ऐसे सुधार लाना है जो भारत की युवा आबादी की आकांक्षाओं के अनुरूप हों। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) अपने न्यूनतम स्तर पर है, जो बैंकों को बड़े सुधार लागू करने के लिए एक आदर्श स्थिति प्रदान करता है।
बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने 'विकसित भारत' के लिए बैंकिंग पर केंद्रित एक उच्च-स्तरीय समिति की घोषणा की, जिसका उल्लेख इस वर्ष के बजट में किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2047 का लक्ष्य अब दूर नहीं है और 2026 के परिप्रेक्ष्य में हमारे पास सुधारों के लिए 20 साल से भी कम का समय बचा है।
बैठक के सात मुख्य स्तंभ
इस सम्मेलन को सात प्रमुख विषयों में विभाजित किया गया था, जिनमें जमा संग्रहण, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र का समर्थन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC), कृषि और बागवानी मूल्य श्रृंखला बुनियादी ढांचा, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण और क्रेडिट कार्ड व्यवसाय का पुनर्गठन शामिल है। बैंक अधिकारियों ने ऐसे नए उत्पादों पर चर्चा की जो ग्राहकों को अधिक लचीलापन और बेहतर रिटर्न प्रदान कर सकें।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि भारत की 29% जनसंख्या 15 से 29 वर्ष की आयु के बीच है। यदि बैंकिंग क्षेत्र इस 'जेन जेड' आबादी को आकर्षित करने में विफल रहता है, तो भविष्य में पूंजी निर्माण और बचत की दर प्रभावित हो सकती है। डिजिटल-फर्स्ट दृष्टिकोण अपनाना अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।
"बैंकिंग सुधारों का केंद्र अब केवल ऋण देना नहीं, बल्कि युवाओं की वित्तीय जीवनशैली के साथ तालमेल बिठाना होना चाहिए।"
एक गंभीर चिंता का विषय घरेलू ऋण में हुई भारी वृद्धि है। मार्च 2026 तक, गैर-आवासीय खुदरा ऋण (उपभोग ऋण) कुल घरेलू ऋण का 58.4% हो गया है। विशेष रूप से फिनटेक कंपनियों द्वारा दिए गए असुरक्षित व्यक्तिगत ऋणों (50,000 रुपये से कम) में जोखिम बढ़ा है, जहाँ 35 वर्ष से कम आयु के उधारकर्ताओं की संख्या अधिक है और डिफॉल्ट दर 6.4% तक पहुँच गई है।
| ऋण श्रेणी | मार्च 2025 (%) | मार्च 2026 (%) |
|---|---|---|
| गैर-आवासीय खुदरा ऋण | 54.9% | 58.4% |
| औसत ऋण प्रति उधारकर्ता | - | ₹4.78 लाख (2025 अंत तक) |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'विकसित भारत' बैंकिंग समिति का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस समिति का उद्देश्य बैंकिंग ढांचे को इस तरह से पुनर्गठित करना है कि वह 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के आर्थिक लक्ष्यों का समर्थन कर सके।
उत्तर: क्योंकि फिनटेक द्वारा दिए गए अधिकांश छोटे ऋण असुरक्षित (Unsecured) हैं और युवाओं में इनकी डिफॉल्ट दर बढ़ रही है।