बी.ए. प्रकाश की नई पुस्तक 'इंडियन इकोनॉमी' विश्लेषण करती है कि कैसे कोविड-19 और यूक्रेन युद्ध के बाद बदली वैश्विक व्यवस्था भारत के लिए विकास के नए द्वार खोल रही है।
- भारत वर्तमान में शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।
- डी-ग्लोबलाइजेशन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बदलाव भारत के पक्ष में काम कर रहे हैं।
- डिजिटल बुनियादी ढांचा और स्थिर लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं।
तिरुवनंतपुरम में हाल ही में चर्चा का विषय बनी एक नई पुस्तक, 'इंडियन इकोनॉमी: कोविड-19 महामारी, यूक्रेन युद्ध और बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था', यह तर्क देती है कि वैश्विक उथल-पुथल ने भारत को एक 'विश्व आर्थिक शक्ति' के रूप में उभरने का सुनहरा अवसर दिया है। लेखक बी.ए. प्रकाश, जो केरल राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं, ने विस्तार से बताया है कि कैसे वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलाव भारत के लिए अनुकूल साबित हो रहे हैं।
पुस्तक के अनुसार, कोविड-19 के बाद के दौर में भारत न केवल दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बना, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रवासन (migration) के वैश्विक नेता और प्रेषण (remittances) के सबसे बड़े प्राप्तकर्ता के रूप में भी उभरा। लेखक का मानना है कि डी-ग्लोबलाइजेशन (deglobalisation) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के विखंडित बाजारों ने भारत को अपनी ताकत दिखाने का मौका दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) का विविधीकरण अब 'चीन+1' रणनीति की ओर बढ़ रहा है, जिससे भारत एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र बन सकता है। यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक है, जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाता है।
पुस्तक में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत का विश्व स्तरीय डिजिटल बुनियादी ढांचा और उच्च शिक्षा के लिए अंग्रेजी भाषा का व्यापक उपयोग इसे अन्य विकासशील देशों की तुलना में बढ़त दिलाता है। साथ ही, एक 'स्थिर लोकतंत्र' के रूप में भारत की छवि विदेशी निवेशकों के लिए विश्वास का केंद्र बनी हुई है।
"1991 के संरचनात्मक समायोजन सुधार और 2014 के बाद के आर्थिक बदलावों ने भारत को एक बड़ी विकास छलांग लगाने के लिए ठोस आधार प्रदान किया है।"
हालांकि, प्रोफेसर प्रकाश ने चेतावनी भी दी है कि भारत को अभी भी अपनी आंतरिक चुनौतियों से निपटना होगा। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक 'दोहरी अर्थव्यवस्था' (dual economy) के रूप में वर्णित किया है, जहाँ एक तरफ विकसित शहरी क्षेत्र हैं और दूसरी तरफ पिछड़ा ग्रामीण क्षेत्र। ग्रामीण गरीबी, बेरोजगारी और किसानों का संकट अभी भी बड़ी बाधाएं हैं।
लेखक ने सुझाव दिया है कि भारत को अब केवल GDP विकास की रणनीति से हटकर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए मजबूत नीतियों की वकालत की है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: बी.ए. प्रकाश की पुस्तक के अनुसार भारत की मुख्य ताकतें क्या हैं?
उत्तर: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थिर लोकतांत्रिक संस्थाएं, अंग्रेजी भाषा का ज्ञान और तेजी से बढ़ती जीडीपी भारत की मुख्य ताकतें हैं।
प्रश्न 2: लेखक ने भारतीय अर्थव्यवस्था में किन सुधारों की आवश्यकता बताई है?
उत्तर: लेखक ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पिछड़ेपन को दूर करने, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को अपनाने और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।