एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से जुलाई के बीच सरकार ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को लगभग 1.95 लाख ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजे। यह वृद्धि विशेष रूप से दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान देखी गई।

  • मार्च से जुलाई के बीच औसतन हर 68 सेकंड में एक ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी किया गया।
  • सबसे अधिक प्रभाव इंस्टाग्राम पर पड़ा, जिसे कुल ऑर्डर्स का आधा हिस्सा (लगभग 1 लाख) मिला।
  • मेटा ने 'सहयोग' पोर्टल के साथ API एकीकृत किया है, जिससे बिना मानवीय समीक्षा के ऑटोमैटिक कंटेंट हटाया जा रहा है।

भारत में डिजिटल सेंसरशिप के स्तर में एक अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च से जुलाई के बीच सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लगभग 1.95 लाख ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजे। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 1,275 ऑर्डर जारी किए गए, जो डिजिटल स्पेस पर सरकारी नियंत्रण के एक नए युग की ओर इशारा करते हैं।

यह अवधि विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसी दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा लीक के खिलाफ छात्रों का तीव्र विरोध प्रदर्शन चल रहा था। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शनों ने इंस्टाग्राम पर जोर पकड़ा, ब्लॉकिंग ऑर्डर्स की संख्या में भी भारी उछाल आया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल कंटेंट हटाने का मामला नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और तकनीकी स्वायत्तता के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। जब सरकार और टेक कंपनियां 'मशीन-टू-मशीन' निष्पादन (API integration) की ओर बढ़ती हैं, तो कानूनी समीक्षा की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

प्लेटफॉर्म-वार वितरण को देखें तो इंस्टाग्राम को सबसे अधिक 1 लाख ऑर्डर मिले, जबकि फेसबुक को 80,000 और यूट्यूब को लगभग 15,000 ऑर्डर प्राप्त हुए। मेटा के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म्स ने कुल ऑर्डर्स का 90% हिस्सा झेला है।

"एक API जो स्वचालित रूप से टेकडाउन करता है, उसके पास कोई ज्ञान नहीं होता। मेटा में कोई भी ऑर्डर नहीं पढ़ता, जिससे एक सशर्त कानूनी कर्तव्य बिना शर्त अनुपालन में बदल जाता है।" - अपार गुप्ता, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन।

सबसे विवादास्पद पहलू मेटा का 'सहयोग' (Sahyog) पोर्टल के साथ API एकीकरण है। इससे सरकार द्वारा फ्लैग किए गए कंटेंट को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या समीक्षा के स्वचालित रूप से हटा दिया जाता है। डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रक्रिया आईटी अधिनियम की कानूनी आवश्यकताओं का उल्लंघन करती है।

प्लेटफॉर्म ब्लॉकिंग ऑर्डर्स (मार्च-जुलाई) मुख्य कारण/लक्ष्य
इंस्टाग्राम ~1,00,000 छात्र विरोध, राजनीतिक आलोचना
फेसबुक ~80,000 विविध सरकारी निर्देश
यूट्यूब ~15,000 वीडियो कंटेंट सेंसरशिप

ऐतिहासिक रूप से, अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच दैनिक औसत केवल छह ऑर्डर था। वर्तमान की यह छलांग (प्रति दिन 1,275) दिखाती है कि सरकार अब वास्तविक समय में डिजिटल विमर्श को नियंत्रित करने के लिए अधिक आक्रामक उपकरणों का उपयोग कर रही है।

क्या आप जानते हैं?: भारत दुनिया के लिए सबसे बड़े सोशल मीडिया उपयोगकर्ता आधार वाला बाजार है, जिसमें 60 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: 'सहयोग' पोर्टल क्या है?
उत्तर: यह गृह मंत्रालय द्वारा विकसित एक प्लेटफॉर्म है जिसका उपयोग केंद्रीय और राज्य एजेंसियों द्वारा सोशल मीडिया कंपनियों को ब्लॉकिंग नोटिस भेजने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 2: आईटी अधिनियम की धारा 79(3)(b) क्या है?
उत्तर: यह वह प्रावधान है जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स को कानूनी प्रतिरक्षा (immunity) बनाए रखने के लिए उन पोस्ट को हटाना पड़ता है जिन्हें सरकार अवैध मानती है।