इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत ₹7,877 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य देश में ही रक्षा-ग्रेड घटकों सहित महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण शुरू करना है, जिससे 10 राज्यों में लगभग 10,000 रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

  • MeitY ने आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए ECMS के तहत ₹7,877 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
  • इस पहल से देश में पहली बार रक्षा-ग्रेड हर्मेटिक टर्मिनल्स और कैपेसिटर पुर्जों का स्थानीय स्तर पर निर्माण शुरू होगा।
  • तमिलनाडु राज्य-वार स्वीकृतियों में सबसे आगे है, और इस योजना से लगभग 10,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत ₹7,877 करोड़ मूल्य की परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी प्रोत्साहन योजना का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ही जटिल इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और सब-असेंबलियों के उत्पादन को बढ़ावा देना है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इन परियोजनाओं की स्वीकृतियां सौंपीं।

इस नवीनतम वित्तीय प्रोत्साहन के साथ ही, ECMS के तहत स्वीकृत परियोजनाओं का कुल संचयी मूल्य अब ₹69,548 करोड़ तक पहुंच गया है। मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस नए ट्रेंच में शुद्ध नई परियोजनाओं के लिए ₹6,844 करोड़ की मंजूरी दी गई है, जबकि आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विप्रो (Wipro) के लैमिनेट्स प्रोजेक्ट के मूल्य में ₹1,033 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई है। ये सभी परियोजनाएं पूर्व-निर्धारित मील के पत्थर (milestones) हासिल करने पर पूंजीगत व्यय (capex) और टर्नओवर-लिंक्ड वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त करने की हकदार होंगी।

पहली बार भारत में होगा इन महत्वपूर्ण घटकों का निर्माण

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके तहत कई ऐसे जटिल इलेक्ट्रॉनिक घटकों का निर्माण भारत में शुरू किया जा रहा है, जिन्हें आज तक देश में कभी नहीं बनाया गया। इनमें इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स, हर्मेटिक टर्मिनल्स (जिनका उपयोग रक्षा-ग्रेड सील असेंबली में किया जाता है), कैपेसिटर के लिए मेटलाइज्ड फिल्म्स और कॉइल्स शामिल हैं। अब तक भारत इन महत्वपूर्ण घटकों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर था, जिससे देश की रणनीतिक और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला संवेदनशील बनी हुई थी।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मंजूरी केवल वित्तीय निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की विनिर्माण रणनीति में एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। अब तक भारत मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स के केवल अंतिम असेंबली (जैसे स्मार्टफोन असेंबलिंग) पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। लेकिन वास्तविक आत्मनिर्भरता और उच्च मूल्यवर्धन तभी संभव है जब देश के भीतर ही घटकों (components) का निर्माण हो। यह कदम चीन और अन्य देशों से आयातित पुर्जों पर भारत की निर्भरता को काफी हद तक कम कर देगा और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती प्रदान करेगा।

यह मंत्रालय के सबसे तेजी से चलने वाले कार्यक्रमों में से एक है, जिसमें हर सप्ताह बड़ी संख्या में मंजूरियां मिल रही हैं। हमने एक ऐसी प्रणाली बनाई है जहां लगभग हर 10 दिनों में हम प्रस्तावों की समीक्षा कर उन्हें मंजूरी दे रहे हैं। - एस. कृष्णन, आईटी सचिव

भौगोलिक विस्तार और रोजगार के अवसर

इस योजना का लाभ देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने के लिए भौगोलिक विविधीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वर्तमान में स्वीकृत आवेदनों में देश के 10 राज्य शामिल हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं। इस विशिष्ट चरण में तमिलनाडु ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जहां सबसे अधिक सात परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। आईटी सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, इन स्वीकृतियों से कुल ₹82,243 करोड़ का उत्पादन होने की उम्मीद है, जिससे लगभग 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)

ऐतिहासिक रूप से, भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग असेंबली-प्रधान रहा है, जहां पुर्जों को विदेशों से आयात कर केवल जोड़ा जाता था। घरेलू मूल्यवर्धन (domestic value addition) मात्र 15% से 20% के बीच सीमित था। इस विसंगति को दूर करने के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति के तहत कई उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) और ECMS जैसी योजनाएं शुरू कीं। वर्तमान में भारत कई क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल कर चुका है, जैसे कि डिवाइस एन्क्लोजर, रिले और ऑप्टिकल ट्रांससीवर्स का देश में ही 100% उत्पादन हो रहा है और इनका निर्यात भी किया जा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक घटक (Component)वर्तमान घरेलू उत्पादन (%)आयात निर्भरता की स्थिति
एन्क्लोजर, रिले और एनोड सामग्री100%पूर्ण आत्मनिर्भर (निर्यात शुरू)
लैमिनेट्स80%कम निर्भरता
कनेक्टर्स75%मध्यम निर्भरता
लिथियम-आयन सेल60%उच्च निर्भरता
ट्रांसड्यूसर55%उच्च निर्भरता
क्या आप जानते हैं?: इस योजना के तहत स्वीकृत हर्मेटिक टर्मिनल्स का उपयोग मुख्य रूप से एयरोस्पेस और सैन्य उपकरणों में किया जाता है, जो अत्यधिक दबाव और तापमान में भी गैस या नमी को अंदर जाने से रोकते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) क्या है?
उत्तर: यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की एक प्रमुख योजना है जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सब-असेंबलियों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय (capex) और टर्नओवर-लिंक्ड वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।

प्रश्न 2: इस योजना से भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या लाभ होगा?
उत्तर: इस योजना से न केवल देश में पहली बार कई महत्वपूर्ण रक्षा-ग्रेड घटकों का निर्माण शुरू होगा, बल्कि इससे ₹82,243 करोड़ का कुल उत्पादन होने और लगभग 10,000 नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।