टाटा समूह की कंपनी वोल्टास ने एटमबर्ग इनोवेशन के साथ एक संयुक्त उद्यम (JV) शुरू करने के लिए हाथ मिलाया है। इसका उद्देश्य एयर कंडीशनर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से 'कंप्रेसर' के लिए चीन पर निर्भरता को खत्म करना और भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है।
- वोल्टास और एटमबर्ग इनोवेशन के बीच 50:50 के संयुक्त उद्यम (JV) के लिए समझौता।
- लक्ष्य: एसी कंप्रेसर और अन्य महत्वपूर्ण घटकों का भारत में निर्माण करना।
- चीन से होने वाले भारी आयात (लगभग 73.7%) को कम करने की रणनीतिक कोशिश।
- 2030 तक भारत में एसी बाजार के लगभग दोगुना होने की संभावना।
भारत में बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण एयर कंडीशनर (AC) की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। हालांकि, इस विकास के पीछे एक बड़ी चुनौती यह है कि एसी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा, कंप्रेसर, अभी भी काफी हद तक विदेशी बाजारों, विशेष रूप से चीन से आयात किया जाता है। इस निर्भरता को समाप्त करने के लिए, टाटा के स्वामित्व वाली कंपनी वोल्टास (Voltas) ने एक बड़ा कदम उठाया है।
वोल्टास ने एटमबर्ग इनोवेशन (Atomberg Innovation), जो कि उपभोक्ता उपकरणों के स्टार्टअप एटमबर्ग टेक्नोलॉजीज की B2B इंजीनियरिंग शाखा है, के साथ एक बाध्यकारी टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत एक 50:50 का संयुक्त उद्यम स्थापित किया जाएगा, जो भारत में रूम एयर कंडीशनर के लिए कंप्रेसर और अन्य संबद्ध घटकों का विकास, निर्माण और आपूर्ति करेगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का एसी उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन स्थानीय इकोसिस्टम उस गति से विकसित नहीं हुआ है। इंडिया एक्सिम बैंक के आंकड़ों के अनुसार, संबंधित श्रेणी में भारत के आयात में चीन की हिस्सेदारी 73.7% थी, जिसका मूल्य लगभग 217.5 मिलियन डॉलर था। भारत सरकार की PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना के माध्यम से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, और एटमबर्ग जैसे स्टार्टअप इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
"घरेलू कंप्रेसर निर्माण न केवल आयात बिल को कम करेगा, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए 'मेक इन इंडिया' के सपने को साकार करेगा।"
यह वोल्टास के लिए घरेलू क्षमता बनाने का दूसरा प्रयास है। इससे पहले 2022 में, वोल्टास ने हांगकांग की हाईली इंटरनेशनल (Highly International) के साथ समझौता किया था, लेकिन 'प्रेस नोट 3' (सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश पर प्रतिबंध) के तहत नियामक मंजूरी न मिलने के कारण वह सौदा रद्द हो गया था। इस बार, वोल्टास ने एक भारतीय पार्टनर चुना है, जिससे नियामक बाधाएं कम होंगी।
भारत का एसी बाजार भविष्य में और बड़ा होने वाला है। अनुमान है कि 2025 में 15.4 मिलियन यूनिट्स की बिक्री से बढ़कर 2030 तक यह आंकड़ा 28 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच सकता है। वर्तमान में, केवल 10% भारतीय घरों में एसी है, जिसका अर्थ है कि बाजार में विस्तार की अपार संभावनाएं हैं।
| विशेषता | पिछला प्रयास (Highly Intl) | वर्तमान प्रयास (Atomberg) |
|---|---|---|
| साझेदार की राष्ट्रीयता | विदेशी (हांगकांग/चीन) | भारतीय |
| नियामक स्थिति | प्रेस नोट 3 के कारण विफल | घरेलू साझेदारी (सुगम) |
| मुख्य उद्देश्य | इन्वर्टर कंप्रेसर निर्माण | पूर्ण स्थानीय इकोसिस्टम विकास |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: एसी में कंप्रेसर का क्या काम होता है?
उत्तर: कंप्रेसर एसी का 'दिल' होता है जो रेफ्रिजरेंट को पूरे सिस्टम में सर्कुलेट करता है और कूलिंग प्रक्रिया को संभव बनाता है।
प्रश्न 2: वोल्टास ने इस बार भारतीय कंपनी को ही क्यों चुना?
उत्तर: विदेशी कंपनियों, विशेषकर चीन से जुड़े निवेशों के लिए सख्त सरकारी नियमों (Press Note 3) के कारण पिछले सौदे विफल रहे थे, इसलिए भारतीय पार्टनर चुनना अधिक सुरक्षित और प्रभावी है।