कॉग्निजेंट इंडिया के सीएमडी राजेश वरियर ने बताया है कि भविष्य में उन्हीं पेशेवरों की मांग होगी जो तकनीकी दक्षता को रचनात्मकता और बिजनेस समझ के साथ जोड़ सकेंगे। उन्होंने शिक्षा और उद्योग के बीच के अंतर को पाटने पर जोर दिया है।
- AI और डिजिटल दक्षता के साथ समस्या-समाधान (Problem-solving) कौशल अनिवार्य है।
- केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं, व्यावहारिक अनुप्रयोग (Practical Application) की आवश्यकता है।
- सफलता के लिए निरंतर सीखने की क्षमता और 'बिल्डर माइंडसेट' जरूरी है।
आज के तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में, रोजगार क्षमता का पैमाना पूरी तरह बदल गया है। राजेश वरियर, प्रेसिडेंट-ग्लोबल ऑपरेशंस और सीएमडी, कॉग्निजेंट इंडिया के अनुसार, अब केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। जैसे-जैसे व्यवसाय AI-संचालित होते जा रहे हैं, नियोक्ताओं को ऐसे स्नातकों की तलाश है जिनके पास डोमेन ज्ञान और तकनीक का सही संतुलन हो।
वरियर का मानना है कि सबसे सफल पेशेवर वे होंगे जो AI और डिजिटल साक्षरता को रचनात्मकता, प्रभावी संचार और व्यावसायिक समझ के साथ एकीकृत कर सकेंगे। उनके अनुसार, भारत के पास एक बड़ा अवसर है, लेकिन इस बढ़त को बनाए रखने के लिए कौशल विकास और आजीवन सीखने (lifelong learning) के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि AI केवल नौकरियों को प्रतिस्थापित नहीं कर रहा है, बल्कि उनकी प्रकृति को बदल रहा है। अब 'स्पेशलिस्ट' के बजाय 'वर्सेटाइल' प्रोफेशनल्स की मांग है जो कोडिंग, डिजाइन और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहजता से काम कर सकें। यह बदलाव भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों है।
"भविष्य उन लोगों का है जो तकनीकी विशेषज्ञता को व्यावहारिक व्यावसायिक समझ, अनुकूलन क्षमता और विकासवादी मानसिकता के साथ जोड़ते हैं।"
वरियर ने कॉलेज शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच एक बड़ा अंतर बताया है। उन्होंने कहा कि अकादमिक पाठ्यक्रम अक्सर उद्योग की गति से पीछे रह जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा संस्थानों और कंपनियों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि पाठ्यक्रम प्रासंगिक बने रहें और छात्रों को उभरती प्रौद्योगिकियों तक पहुंच मिले।
स्नातकों के लिए तीन प्राथमिकताएं
छात्रों के लिए वरियर ने तीन मुख्य क्षेत्रों में निवेश करने की सलाह दी है:
| प्राथमिकता | मुख्य फोकस | उद्देश्य |
|---|---|---|
| डिजिटल साक्षरता | AI और नए टूल्स | तकनीकी दक्षता हासिल करना |
| क्रिटिकल थिंकिंग | समस्या समाधान | तकनीक के माध्यम से मूल्य सृजन |
| सॉफ्ट स्किल्स | संचार और सहयोग | विविध टीमों के साथ प्रभावी कार्य |
कॉग्निजेंट जैसी कंपनियां अब 'फुल-स्टैक AI समाधान' बना रही हैं, जिसके लिए उन्हें ऐसे टैलेंट की जरूरत है जिसमें 'बिल्डर माइंडसेट' हो—यानी ऐसा व्यक्ति जो AI का उपयोग करके प्रयोग कर सके और मापने योग्य व्यावसायिक मूल्य प्रदान कर सके।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: AI युग में केवल कोडिंग सीखना काफी है?
नहीं, राजेश वरियर के अनुसार, कोडिंग के साथ-साथ डोमेन विशेषज्ञता, रचनात्मकता और बिजनेस समझ का होना अनिवार्य है।
प्रश्न 2: शिक्षा संस्थानों को क्या बदलाव करने चाहिए?
उन्हें अपने पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाना चाहिए और उद्योग के साथ जुड़कर व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने पर ध्यान देना चाहिए।