तिरुपुर में किसानों ने BPCL के इरुगुर-देवनगोंथी पाइपलाइन प्रोजेक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसान मुआवजे में बढ़ोतरी और भूमि वापसी की मांग कर रहे हैं।
- किसानों ने ₹2 लाख प्रति सेंट मुआवजे की मांग की है।
- 60 फीट में से 40 फीट भूमि वापस मांगी गई है।
- प्रोजेक्ट का काम तिरुपुर के दो प्रमुख स्थानों पर रुका हुआ है।
- कावेरी जल विवाद के कारण किसानों में रोष है।
तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के इरुगुर-देवनगोंथी पाइपलाइन (IDPL) प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को किसानों ने सिकारीपुरम और पोनपाराप्पी नामक स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने के काम को पूरी तरह से रोक दिया।
विरोध कर रहे किसानों की मुख्य मांग यह है कि कृषि भूमि के लिए मुआवजे की दर को बढ़ाकर ₹2 लाख प्रति सेंट किया जाए। इसके अतिरिक्त, किसान यह भी मांग कर रहे हैं कि पाइपलाइन बिछाने के बाद, प्रोजेक्ट के लिए आरक्षित 60 फीट भूमि में से 40 फीट भूमि उन्हें वापस कर दी जाए ताकि वे खेती जारी रख सकें।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संघर्ष केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भूमि अधिकारों और क्षेत्रीय राजनीति का एक जटिल मिश्रण है। यदि यह विवाद नहीं सुलझता है, तो ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास में देरी हो सकती है, जिससे अंतरराज्यीय ईंधन आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
किसानों का तर्क है कि भूमि का उपयोग करने के बाद उनके खेतों की उर्वरता और मूल्य दोनों कम हो जाते हैं, जिसके लिए उचित मुआवजा अनिवार्य है।
विरोध का एक बड़ा कारण राजनीतिक और क्षेत्रीय है। तमिलनाडु किसान संरक्षण संघ के संस्थापक ईसन मुरुगेसन ने कहा कि जब कर्नाटक कावेरी नदी का तमिलनाडु का हिस्सा देने से इनकार कर रहा है, तो तमिलनाडु के किसानों को कर्नाटक की ओर जाने वाली पाइपलाइन के लिए अपनी जमीन देने का कोई कारण नहीं है।
ऐतिहासिक रूप से, 30 साल पहले इरुगुर से मुथुर तक 74 किमी लंबी पहली पाइपलाइन बिछाने के बाद, इन किसानों की भूमि का मूल्य काफी गिर गया था। किसानों का कहना है कि उस समय के बाद से बैंकों ने उन्हें कृषि ऋण देने में भी आनाकानी की है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: किसान मुआवजे के लिए क्या मांग कर रहे हैं?
उत्तर: किसान ₹2 लाख प्रति सेंट मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
प्रश्न 2: विवाद का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य कारण भूमि का कम मुआवजा, भूमि की वापसी की मांग और कावेरी जल विवाद से जुड़ी नाराजगी है।