भारत सरकार ने क्लियर फ्लोट ग्लास के आयात पर ₹34,000 प्रति मीट्रिक टन का न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) निर्धारित किया है। इस फैसले से घरेलू कांच उत्पादकों को सस्ते विदेशी आयात से सुरक्षा मिलेगी।

  • क्लियर फ्लोट ग्लास (4mm से 12mm) के आयात पर ₹34,000 प्रति मीट्रिक टन का न्यूनतम मूल्य लागू।
  • DGFT ने आयात नीति को 'मुक्त' से बदलकर 'प्रतिबंधित' कर दिया है।
  • यह नियम अधिसूचना जारी होने की तिथि से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा।
  • Saint-Gobain और Asahi India जैसे घरेलू दिग्गजों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद।

नई दिल्ली: भारत के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने देश के कांच उद्योग को मजबूती देने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। सरकार ने क्लियर फ्लोट ग्लास के आयात पर ₹34,000 प्रति मीट्रिक टन का न्यूनतम आयात मूल्य (Minimum Import Price - MIP) निर्धारित कर दिया है। यह कदम विशेष रूप से उन सस्ते आयातित उत्पादों को रोकने के लिए उठाया गया है जो भारतीय बाजार में घरेलू कीमतों को अस्थिर कर रहे थे।

नीति में क्या बदलाव हुआ है?

DGFT द्वारा 18 अगस्त, 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, 4 मिमी से 12 मिमी मोटाई वाले क्लियर फ्लोट ग्लास (ITC HS कोड 70051090 और 70052990) के आयात की स्थिति को 'मुक्त' (Free) से बदलकर 'प्रतिबंधित' (Restricted) कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि अब केवल वही शिपमेंट भारत में प्रवेश कर पाएंगे जिनका मूल्य CIF आधार पर ₹34,000 प्रति टन या उससे अधिक होगा।

घरेलू उद्योग पर प्रभाव

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस निर्णय का सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव Saint-Gobain और Asahi India जैसे प्रमुख घरेलू उत्पादकों पर पड़ेगा। अब तक, बाजार में कम कीमत वाले विदेशी कांच की भरमार थी, जिससे स्थानीय कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना रहता था। इस 'प्राइस फ्लोर' (Price Floor) के माध्यम से, सरकार ने एक समान प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाने की कोशिश की है।

यह नीतिगत बदलाव घरेलू विनिर्माण को संरक्षण देने और 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

अपवाद और छूट

हालांकि यह नियम सख्त है, लेकिन सरकार ने कुछ विशेष क्षेत्रों को इससे बाहर रखा है। एडवांस ऑथोराइजेशन धारक, निर्यात उन्मुख इकाइयां (EOUs) और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थित इकाइयां इस नियम से मुक्त रहेंगी, बशर्ते कि आयातित सामग्री को बाद में घरेलू बाजार (DTA) में नहीं बेचा जाएगा।

ऐतिहासिक संदर्भ

भारत में कांच उद्योग पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट क्षेत्र में वृद्धि के कारण तेजी से विकसित हुआ है। हालांकि, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव और कम लागत वाले देशों से भारी आयात ने स्थानीय विनिर्माण क्षमता के लिए चुनौतियां पैदा की थीं। यह नया MIP नियम इसी असंतुलन को ठीक करने का एक प्रयास है।

Frequently Asked Questions

1. यह नया नियम कितने समय तक लागू रहेगा?
यह नियम अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा।

2. क्या सभी प्रकार के कांच पर यह प्रतिबंध लागू है?
नहीं, यह विशेष रूप से 4 मिमी से 12 मिमी मोटाई वाले 'क्लियर फ्लोट ग्लास' पर लागू होता है।